अस्थमा अटैक कितना खतरनाक? जानें कब बन सकता है जानलेवा और क्या सावधानियां जरूरी


 अस्थमा को अक्सर लोग सांस से जुड़ी सामान्य समस्या मान लेते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकती है। अस्थमा अटैक के दौरान सांस की नलियों में सूजन बढ़ जाती है और वे सिकुड़ने लगती हैं। इससे हवा का आवागमन प्रभावित होता है और व्यक्ति को सांस लेने में काफी परेशानी हो सकती है। ऐसे में समय पर इलाज और सही सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है।

हाल ही में फ्लाइट में अस्थमा अटैक के बाद एक व्यक्ति की मौत की घटना ने इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, हर अस्थमा अटैक जानलेवा नहीं होता, लेकिन गंभीर अटैक में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

अस्थमा अटैक में शरीर में क्या होता है?

अस्थमा के दौरान सांस की नलियों की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। साथ ही मांसपेशियां सिकुड़ सकती हैं और अधिक म्यूकस बनने से वायुमार्ग और संकरा हो जाता है। इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न, खांसी और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज महसूस हो सकती है।

गंभीर अटैक में सांस लेने की परेशानी तेजी से बढ़ सकती है। व्यक्ति को बोलने में दिक्कत हो सकती है, वह बहुत ज्यादा थकान या घबराहट महसूस कर सकता है और होंठ या चेहरा नीला पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है।

अटैक आने पर क्या सावधानी रखें?

अस्थमा अटैक के दौरान सबसे पहले व्यक्ति को शांत रखने की कोशिश करें। उसे सीधा बैठाएं और लेटने से बचाएं। अगर डॉक्टर ने पहले से रिलीवर इनहेलर इस्तेमाल करने की सलाह दी है, तो उसे डॉक्टर के बताए तरीके और निर्धारित मात्रा के अनुसार इस्तेमाल करें।

धुआं, धूल, परफ्यूम या ऐसे अन्य ट्रिगर से व्यक्ति को दूर रखें, जो उसकी सांस की समस्या बढ़ा सकते हैं। अगर इनहेलर लेने के बाद भी सांस लेने में परेशानी कम नहीं हो रही है, लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं या व्यक्ति बोलने में असमर्थ हो रहा है, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

कब स्थिति को गंभीर समझें?

सांस लेने में लगातार बढ़ती परेशानी, रिलीवर इनहेलर से राहत न मिलना, बोलने या चलने में कठिनाई, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या होंठ-चेहरे का नीला पड़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में घर पर इंतजार करने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए।

अस्थमा के मरीजों को अपनी दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखना चाहिए। साथ ही अपने ट्रिगर और अटैक के शुरुआती संकेतों की जानकारी होना भी जरूरी है। सही उपचार और समय पर आपातकालीन मदद से गंभीर स्थिति के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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