प्रधानमंत्री मोदी के नाम कितने कीर्तिमान, उपलब्धियां क्या; नेहरू-इंदिरा के कौन से रिकॉर्ड अभी दूर?


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उनके राजनीतिक सफर और प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज कई रिकॉर्ड की चर्चा हो रही है। मोदी मई 2014 से लगातार प्रधानमंत्री पद पर हैं और 2024 में उन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2026 में उन्होंने लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने के मामले में जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

लगातार प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड

10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4,399 दिन पूरे किए। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के लगातार कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह रिकॉर्ड प्रधानमंत्री पद पर बिना किसी अंतराल के लगातार सेवा से जुड़ा है।

मोदी 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बने। 2024 में तीसरी बार सरकार बनाने के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद हासिल करने वाले दूसरे व्यक्ति बने। हालांकि, 2024 में बीजेपी को अकेले बहुमत नहीं मिला और सरकार एनडीए गठबंधन के साथ बनी।

नेहरू का कौन सा रिकॉर्ड अभी बाकी है?

लगातार कार्यकाल के रिकॉर्ड में नेहरू को पीछे छोड़ने के बावजूद कुल प्रधानमंत्री कार्यकाल के मामले में तस्वीर अलग है। नेहरू 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे। उनका कुल कार्यकाल करीब 16 वर्ष 9 महीने था। मोदी का प्रधानमंत्री पद पर सफर मई 2014 से जारी है। इसलिए कुल समय के लिहाज से नेहरू के पूरे कार्यकाल को पार करने का आंकड़ा अलग तरीके से देखा जाता है।

इंदिरा गांधी से जुड़ा रिकॉर्ड

इंदिरा गांधी भारत की दूसरी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाली नेताओं में शामिल हैं। उनका प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल दो अलग-अलग अवधियों में रहा। 1966 से 1977 और फिर 1980 से 1984 तक उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला। इस वजह से कुल कार्यकाल और लगातार कार्यकाल के रिकॉर्ड अलग-अलग हैं।

इस लिहाज से मोदी के नाम लगातार प्रधानमंत्री रहने का नया रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है, जबकि कुल प्रधानमंत्री कार्यकाल से जुड़े ऐतिहासिक आंकड़ों में नेहरू और इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड अलग-अलग आधार पर तुलना का विषय बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर इन रिकॉर्डों की चर्चा यह भी दिखाती है कि भारतीय राजनीति में अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना करते समय लगातार सेवा, कुल कार्यकाल और चुनावी जनादेश जैसे मानकों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

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