नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत को लेकर खोले पत्ते, रिश्तों को बताया बेहतरीन; व्यापार और ऊर्जा पर बढ़ा फोकस


 India-Nepal Relations: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ मौजूदा रिश्तों को बेहतर और मजबूत बताया है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव जरूर आए हैं, लेकिन फिलहाल रिश्ते अच्छी स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल अब पुराने मतभेदों पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

जयशंकर से मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई बात?

शिशिर खनाल ने जून 2026 में भारत का आधिकारिक दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार और निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, विकास सहयोग और लोगों के बीच संबंधों समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

नेपाल के विदेश मंत्री ने बाद में संसद को दी जानकारी में भी कहा था कि बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा साझेदारी, जल संसाधन, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा हुई। डिजिटल तकनीक और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी दोनों देशों ने कदम उठाए।

नेपाल के लिए भारत क्यों अहम है?

भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और विदेशी निवेश का प्रमुख स्रोत है। भारतीय दूतावास के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार करीब 9.38 अरब डॉलर रहा, जो नेपाल के कुल बाहरी वस्तु व्यापार का 60 प्रतिशत से अधिक है। नेपाल के वस्तु निर्यात का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा भारत जाता है।

दोनों देशों के बीच खुली सीमा और गहरे सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध भी रिश्तों को विशेष बनाते हैं। भारत ने नेपाल में सड़क, रेलवे, पेट्रोलियम पाइपलाइन, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी सहयोग किया है।

ऊर्जा सहयोग बन सकता है बड़ा क्षेत्र

ऊर्जा भारत-नेपाल संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नेपाल के पास बड़ी जलविद्युत क्षमता है और दोनों देश बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और सीमा पार बिजली व्यापार में सहयोग कर रहे हैं। 2022 के पावर सेक्टर सहयोग दस्तावेज में संयुक्त परियोजनाओं, क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन और बिजली व्यापार को आगे बढ़ाने की दिशा तय की गई थी।

नेपाल के विदेश मंत्री ने भी अपने हालिया संबोधन में जलविद्युत को क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया और भारत को स्वच्छ बिजली निर्यात की संभावनाओं का उल्लेख किया।

चीन के साथ भी व्यावहारिक रिश्तों पर जोर

भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के साथ नेपाल चीन के साथ भी व्यावहारिक और आर्थिक सहयोग जारी रखना चाहता है। खनाल ने कहा है कि नेपाल भारत और चीन दोनों के साथ अपने संबंधों को संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और पारस्परिक लाभ के आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है। उनके अनुसार नेपाल का जोर वैचारिक टकराव के बजाय व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों पर है।

इस तरह भारत-नेपाल संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्र आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सहयोग तंत्र और नियमित उच्चस्तरीय बातचीत इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का आधार प्रदान करते हैं।

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