अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के बीच मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थाओं को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। राम मंदिर के नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्र ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर मंदिर की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में सबसे ज्यादा जोर श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार और मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखने पर दिया गया। सीईओ ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में उनके साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण व्यवहार करना सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।
एक हजार कर्मचारियों को अनुशासन में रहने की हिदायत
मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े करीब एक हजार कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से पालन करने की नसीहत दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर तैनात कर्मचारियों को अनुशासन, मर्यादा और सेवा भाव के साथ काम करना होगा।
सीईओ जितेंद्र मिश्र ने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी कर्मचारी अपने निर्धारित दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन करें।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी जोर
बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। दर्शन के लिए आने वाले लोगों को व्यवस्थित तरीके से सुविधा उपलब्ध कराने, भीड़ को नियंत्रित रखने और जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं की मदद करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन की कोशिश है कि राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान बेहतर अनुभव मिले। इसके लिए कर्मचारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी के मामले ने मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में नए सीईओ की बैठक को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन अब कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और अनुशासन पर विशेष निगरानी रखने की दिशा में काम कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि मंदिर परिसर में सेवा देने वाले प्रत्येक कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की गरिमा को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता, अनुशासन और बेहतर सेवा व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
नई व्यवस्था के तहत मंदिर प्रशासन का मुख्य लक्ष्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन उपलब्ध कराना है। साथ ही कर्मचारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे सेवा भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
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