टारगेट लिस्ट तैयार, बम भी लोड... आखिरी वक्त में ट्रंप ने 'दोस्त' को क्यों दिया धोखा?


 सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी सुरक्षा चुनौती को लेकर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर मदद मांगी। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब की ओर से अमेरिका से हूती ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग की अपील की गई थी।

मामला उस समय और चर्चा में आया, जब अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियों की खबरें सामने आईं। बताया गया कि संभावित लक्ष्यों की सूची तैयार की गई थी और सैन्य कार्रवाई के लिए हथियार भी तैयार रखे गए थे। हालांकि, अंतिम समय में इस कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया गया।

सऊदी अरब ने क्यों मांगी अमेरिका से मदद?

यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। हूती समूह की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं बढ़ती रही हैं। ऐसे में रियाद ने अमेरिका से अपनी सुरक्षा में सहयोग की अपील की।

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रणनीतिक और सुरक्षा संबंध हैं। सऊदी अरब अमेरिकी हथियारों का प्रमुख खरीदार भी रहा है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नियमित संपर्क रहता है।

कार्रवाई की तैयारी, फिर बदला फैसला

रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिका ने हूती ठिकानों के खिलाफ संभावित हमले की तैयारी की थी। इसके तहत लक्ष्यों की पहचान और सैन्य संसाधनों की तैयारी की गई थी। लेकिन आखिरी चरण में राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्रवाई को आगे बढ़ाने के बजाय दूसरा रास्ता चुना।

इस फैसले के पीछे अमेरिका की क्षेत्रीय नीति, संभावित सैन्य जोखिम और व्यापक कूटनीतिक समीकरणों को लेकर विचार किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, कार्रवाई रोकने के फैसले के सटीक कारणों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आकलन सामने आ सकते हैं।

अमेरिका-सऊदी रिश्तों पर क्या असर?

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संबंध रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग पर आधारित हैं। ऐसे में सऊदी अपील के बावजूद अमेरिकी कार्रवाई नहीं होने की खबर दोनों देशों के संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वहीं, यमन में हूती गतिविधियों और लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अमेरिका तथा उसके सहयोगी लगातार नजर बनाए हुए हैं। हूती हमलों का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ता रहा है।

अब निगाह इस बात पर है कि अमेरिका भविष्य में हूती समूह के खिलाफ क्या रणनीति अपनाता है और सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को किस तरह संबोधित किया जाता है।

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