Universal Pension Scheme: केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय की ओर से एक नई यूनिवर्सल पेंशन स्कीम पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित योजना को EPFO के तहत लाने की तैयारी है और इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा कामगारों को रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की सुविधा देना है। खास बात यह है कि इसमें अंशदान और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम को लेकर ज्यादा लचीलापन देने का प्रस्ताव है।
जब पैसा हो, तब कर सकेंगे अंशदान
प्रस्तावित योजना में कामगारों को हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने की बाध्यता से राहत मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सदस्य अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग समय पर योगदान कर सकेंगे। यानी जिस समय कमाई ज्यादा हो, उस समय ज्यादा पैसा जमा किया जा सकता है और जरूरत के समय योगदान कम या रोका भी जा सकता है।
इसका फायदा खासतौर पर उन कामगारों को मिल सकता है जिनकी आय नियमित नहीं है। गिग वर्कर्स, स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को भी इसके दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन में भी लचीलापन
इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर बताई जा रही है। शुरुआती वर्षों में अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा पैसों की जरूरत है तो वह अपने जमा फंड से ज्यादा राशि निकालकर अधिक पेंशन ले सकता है। बाद में आर्थिक जरूरत कम होने पर मासिक निकासी घटाई जा सकती है।
बची हुई रकम EPFO के पास रह सकती है और उस पर ब्याज मिलता रहेगा। इस तरह रिटायरमेंट फंड को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
तय कर सकेंगे अपना रिटायरमेंट लक्ष्य
प्रस्तावित मॉडल में Target Retirement Sum (TRS) जैसी सुविधा भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है। इसके जरिए व्यक्ति अपनी मनचाही रिटायरमेंट आय का लक्ष्य तय कर सकेगा और यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि उस लक्ष्य के लिए कितना फंड जमा करना होगा।
किन लोगों को मिल सकता है फायदा?
इस योजना का दायरा मौजूदा EPFO व्यवस्था से बाहर के कामगारों तक बढ़ाने पर विचार हो रहा है। इसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स, स्वरोजगार करने वाले तथा असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हो सकते हैं। हालांकि, योजना अभी प्रस्ताव और कॉन्सेप्ट नोट के स्तर पर है और अंतिम नियमों को मंजूरी मिलना बाकी है।
क्या यह मौजूदा पेंशन को खत्म करेगी?
नहीं। प्रस्तावित यूनिवर्सल पेंशन व्यवस्था को मौजूदा Employees' Pension Scheme (EPS) के साथ चलाने की योजना बताई गई है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त और ज्यादा लचीला रिटायरमेंट विकल्प उपलब्ध कराना है, न कि मौजूदा EPS को तुरंत खत्म करना।
कुल मिलाकर, अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो रिटायरमेंट प्लानिंग का तरीका बदल सकता है। नियमित नौकरी या निश्चित आय वाले लोगों के साथ-साथ अनियमित कमाई करने वाले कामगार भी अपनी क्षमता के अनुसार रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकेंगे। हालांकि, अभी इसे अंतिम सरकारी योजना न मानें, क्योंकि विस्तृत नियम और अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
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