अमेरिकी राजनीति में अक्सर अपने अलग अंदाज के लिए चर्चा में रहने वाले डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके नाम से जुड़े एक सिक्के को लेकर है। सोशल मीडिया और आम बोलचाल में इसे कई बार ‘गोल्डन डॉलर’ कहा जाता है। हालांकि, नाम से ऐसा लगता है कि यह सिक्का सोने से बना होगा, लेकिन वास्तव में इसके निर्माण में किसी तरह की कीमती धातु या वास्तविक सोने का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इस सिक्के को लेकर एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर को आधिकारिक मुद्रा या सिक्के पर इस्तेमाल किया जा सकता है? अमेरिका में इस संबंध में कुछ विशेष नियम हैं, जिनके कारण ट्रंप की तस्वीर वाले सिक्के को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
जीवित व्यक्ति की तस्वीर पर क्या है नियम?
अमेरिकी मुद्रा के इतिहास में राष्ट्रपति और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की तस्वीरें देखने को मिलती हैं। हालांकि, अमेरिकी आधिकारिक मुद्रा पर आम तौर पर मृत व्यक्तियों के चित्र ही इस्तेमाल किए जाते हैं। इसका उद्देश्य मुद्रा को राष्ट्रीय इतिहास और विरासत से जोड़ना है।
यही वजह है कि किसी जीवित राष्ट्रपति या अन्य जीवित व्यक्ति की तस्वीर को आधिकारिक अमेरिकी मुद्रा पर छापने का सवाल कानूनी और संवैधानिक नियमों से जुड़ जाता है। आधिकारिक मुद्रा और निजी तौर पर बनाए गए स्मारक या कलेक्टर सिक्कों के नियम एक जैसे नहीं होते।
‘गोल्डन डॉलर’ असल में कितना सोना है?
ट्रंप से जुड़े जिस सिक्के को सोशल मीडिया पर ‘गोल्डन डॉलर’ कहा जा रहा है, उसके नाम से भ्रम पैदा हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सिक्का शुद्ध सोने का बना है। ऐसे सिक्कों में सुनहरे रंग या गोल्ड-प्लेटेड फिनिश का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि अंदर की धातु अलग हो सकती है।
इसलिए किसी सिक्के का सुनहरा दिखाई देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसमें वास्तविक सोना मौजूद है।
क्या यह आधिकारिक अमेरिकी मुद्रा है?
यहां आधिकारिक सरकारी मुद्रा और निजी तौर पर जारी किए गए सिक्के के बीच अंतर समझना जरूरी है। अमेरिका में निजी कंपनियां या संगठन स्मारक, कलेक्टर या प्रचारात्मक सिक्के जारी कर सकते हैं। ऐसे सिक्कों को देखकर उन्हें अमेरिकी सरकार द्वारा जारी आधिकारिक मुद्रा समझ लेना सही नहीं होगा।
ट्रंप से जुड़े इस सिक्के को लेकर भी यही सवाल महत्वपूर्ण है कि इसे किस संस्था ने जारी किया है और इसका कानूनी दर्जा क्या है। इसलिए केवल ‘डॉलर’ नाम या सुनहरे रंग के आधार पर इसे अमेरिकी आधिकारिक मुद्रा मानना उचित नहीं है।
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