ब्रेस्ट कैंसर की जांच: मैमोग्राफी कितनी भरोसेमंद? नए शोध ने ओवरडायग्नोसिस पर डाली नई रोशनी


 ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए मैमोग्राफी को महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग टेस्ट माना जाता है। इसमें एक्स-रे इमेजिंग की मदद से स्तन में ऐसे बदलावों का पता लगाने की कोशिश की जाती है, जो अभी गांठ के रूप में महसूस न हो रहे हों। हालांकि, मैमोग्राफी स्क्रीनिंग को लेकर लंबे समय से ओवरडायग्नोसिस यानी ऐसे कैंसर का पता चलने की बहस होती रही है, जो व्यक्ति के जीवनकाल में कभी गंभीर समस्या न बनता। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक नए मेटा-विश्लेषण ने इस जोखिम के पुराने अनुमानों पर दोबारा सवाल उठाए हैं।

ओवरडायग्नोसिस क्या होता है?

ओवरडायग्नोसिस का मतलब ऐसे कैंसर का स्क्रीनिंग के दौरान पता चलना है, जो बिना जांच के शायद व्यक्ति के जीवनकाल में कभी लक्षण पैदा नहीं करता। समस्या यह है कि किसी एक व्यक्ति में पहले से यह तय करना संभव नहीं होता कि पाया गया कैंसर आगे बढ़ेगा या नहीं। इसलिए असामान्य परिणाम मिलने पर अतिरिक्त जांच, बायोप्सी और उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

नए शोध में क्या सामने आया?

14 सितंबर 2026 को Journal of the National Cancer Institute में प्रकाशित नए मेटा-विश्लेषण में पुराने मैमोग्राफी ट्रायल्स के आंकड़ों का एक समान तरीके से दोबारा विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने स्क्रीनिंग के बाद होने वाली जांच और फॉलो-अप अवधि जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा। अध्ययन का निष्कर्ष था कि उपलब्ध आंकड़ों में ओवरडायग्नोसिस की दर 5 प्रतिशत से कम होने के अनुरूप परिणाम मिले।

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि पहले प्रकाशित अध्ययनों में ओवरडायग्नोसिस के अनुमान काफी अलग-अलग रहे हैं। इसका एक कारण यह है कि अलग-अलग अध्ययनों में इसकी गणना करने के तरीके और फॉलो-अप की अवधि अलग रही।

क्या मैमोग्राफी पूरी तरह जोखिम-मुक्त है?

नहीं। स्क्रीनिंग से जुड़े संभावित नुकसान में गलत-सकारात्मक परिणाम, गलत-नकारात्मक परिणाम, अतिरिक्त इमेजिंग, बायोप्सी, ओवरडायग्नोसिस और कम मात्रा में रेडिएशन एक्सपोजर शामिल हैं। अमेरिकी USPSTF के अनुसार 40 से 74 वर्ष की महिलाओं में हर दो साल पर मैमोग्राफी स्क्रीनिंग का कुल लाभ मध्यम स्तर का है, हालांकि स्क्रीनिंग के फायदे और नुकसान दोनों पर विचार करना जरूरी है।

इसलिए मैमोग्राफी को लेकर सवाल यह नहीं है कि यह हर स्थिति में सही या गलत है। स्क्रीनिंग की उपयोगिता उम्र, व्यक्तिगत जोखिम, पारिवारिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है।

महिलाओं को क्या समझना चाहिए?

नए शोध से ओवरडायग्नोसिस के पुराने ऊंचे अनुमानों को लेकर तस्वीर कुछ बदलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्क्रीनिंग से जुड़े सभी सवाल खत्म हो गए हैं। अलग-अलग शोधों में परिणामों का अंतर अभी भी मौजूद है और व्यक्तिगत स्तर पर जोखिम का अनुमान लगाना जटिल है।

इसलिए ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग कराने या उसकी अवधि तय करने का फैसला डॉक्टर से चर्चा के बाद करना उचित है। खासकर यदि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा हो, पहले कोई असामान्य रिपोर्ट आई हो या अन्य जोखिम कारक मौजूद हों, तो व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार स्क्रीनिंग की योजना बनाई जा सकती है।

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