ईरान ने दक्षिण कोरिया को दी चेतावनी, अमेरिका का साथ देने पर बढ़ सकता है तनाव


 ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब दक्षिण कोरिया को लेकर भी तेहरान की नाराजगी सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और किसी भी तरह के समर्थन को लेकर कड़ा संदेश दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दक्षिण कोरिया रणनीतिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संभावित कदमों पर विचार कर रहा है।

दक्षिण कोरिया को क्यों दी गई चेतावनी?

ईरान का कहना है कि फारस की खाड़ी में किसी देश की सैन्य मौजूदगी अगर अमेरिकी अभियान को समर्थन देती है, तो इसे तेहरान आक्रामकता के समर्थन के तौर पर देख सकता है। बघाई ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की है।

ईरान की यह चेतावनी दक्षिण कोरिया की उस स्थिति के बीच आई है, जिसमें सियोल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के मुताबिक इनमें सैन्य विकल्प भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि अभी किसी अंतिम फैसले की घोषणा नहीं हुई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

ईरान ने हाल में हॉर्मुज के आसपास एक नए प्रतिबंधित क्षेत्र की घोषणा करने की योजना भी बताई है। तेहरान के मुताबिक इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

दक्षिण कोरिया के सामने बड़ी चुनौती

दक्षिण कोरिया के लिए यह मुद्दा आर्थिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर करता है। ऐसे में हॉर्मुज में लंबे समय तक तनाव रहने से सियोल की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया के सुरक्षा संबंध भी मजबूत हैं। ऐसे में वॉशिंगटन के दबाव और तेहरान की चेतावनी के बीच सियोल के सामने संतुलन बनाने की चुनौती है।

क्या और बढ़ सकता है तनाव?

फिलहाल दक्षिण कोरिया ने हॉर्मुज में किसी सैन्य तैनाती को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। वहीं ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को समर्थन देने वाले कदमों को वह गंभीरता से लेगा।

ऐसे में दक्षिण कोरिया का अगला कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सियोल अमेरिकी नेतृत्व वाले किसी सैन्य प्रयास में सीधे शामिल होता है, तो इससे ईरान और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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