इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अहमदिया मुस्लिम समुदाय की सराहना करते हुए उसे साझा जीवन और सहनशीलता की मिसाल बताया। हाइफा में आयोजित जलसा सालाना कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान मदीना के संविधान से लेकर यहूदी-मुस्लिम संवाद जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्रपति हर्जोग ने अहमदिया समुदाय के सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग आस्थाओं और समुदायों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना आज के समय में महत्वपूर्ण है। उनके संबोधन में धार्मिक विविधता के बीच संवाद और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को प्रमुखता दी गई।
हाइफा में आयोजित जलसा सालाना अहमदिया समुदाय के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। इस दौरान धार्मिक विचारों के साथ-साथ समाज में शांति, सहिष्णुता और विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने इतिहास और वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में यहूदी-मुस्लिम संवाद की संभावनाओं पर विचार रखे।
कार्यक्रम में मदीना के संविधान का भी उल्लेख हुआ। इतिहास में इसे विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक और राजनीतिक संबंधों को व्यवस्थित करने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में चर्चा में रखा जाता है। इसी संदर्भ में धार्मिक विविधता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व से जुड़े पहलुओं पर विचार साझा किए गए।
इस कार्यक्रम में भारत के राजदूत जेपी सिंह ने भी अहमदिया समुदाय को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने समुदाय की गतिविधियों और विभिन्न समाजों के बीच संवाद की भूमिका का उल्लेख किया। उनके संबोधन में आपसी समझ, शांति और सह-अस्तित्व जैसे विषयों पर जोर दिखाई दिया।
अहमदिया समुदाय लंबे समय से धार्मिक सहिष्णुता और अंतरधार्मिक संवाद से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। जलसा सालाना जैसे आयोजनों में धार्मिक चर्चाओं के साथ सामाजिक मुद्दों और विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों पर भी विचार-विमर्श किया जाता है।
हाइफा के इस कार्यक्रम में इस्राइली राष्ट्रपति और भारतीय राजदूत की मौजूदगी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया। कार्यक्रम में साझा जीवन, धार्मिक सहिष्णुता और यहूदी-मुस्लिम संवाद जैसे विषयों पर हुई चर्चा ने अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद की भूमिका को रेखांकित किया।
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