भारत की चिंताओं को लेकर अमेरिका गंभीर नहीं, जयशंकर ने बताई रिश्तों में चुनौती


 न्यूयॉर्क: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आ रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़ी चुनौतियों पर बात की। उन्होंने खास तौर पर आतंकवाद और भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर अमेरिकी रवैये का जिक्र किया।

जयशंकर के मुताबिक, भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना करता रहा है। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर भारत की चिंताओं को अमेरिका की ओर से जिस स्तर की समझ और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है, वह हमेशा दिखाई नहीं देती। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों में विश्वास और गर्मजोशी बढ़ाने में एक चुनौती के तौर पर सामने रखा।

विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भारत-अमेरिका संबंध केवल सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। हाल के समय में व्यापार से जुड़े मुद्दों और अमेरिकी नीतियों को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत कर रहे हैं। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं, जहां व्यापार संबंधी वार्ता आगे बढ़ाने की योजना है।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून को लेकर भी भारत ने अपनी चिंताएं अमेरिका के सामने रखी हैं। 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। भारत ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक चिंताओं को अमेरिका के सामने रखा, जबकि अमेरिकी विदेश विभाग ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के महत्व को दोहराया।

भारत का रुख यह रहा है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसलों को उसके अपने आर्थिक हितों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिका रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर अपनी नीतियों पर आगे बढ़ रहा है। यही अंतर दोनों देशों के बीच बातचीत का एक अहम विषय बना हुआ है।

इसके बावजूद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जारी है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, जयशंकर और रुबियो ने हालिया बैठक में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराया था।

जयशंकर की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में सहयोग के साथ-साथ कुछ गंभीर मतभेद भी मौजूद हैं। आने वाले समय में आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रूस से जुड़े प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि द्विपक्षीय संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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