बिना हाई बीपी और धूम्रपान के भी आया स्ट्रोक, फिटनेस कोच का बायां हिस्सा हुआ लकवाग्रस्त


 आमतौर पर स्ट्रोक को हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज और अन्य जोखिम कारकों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन 33 वर्षीय फिटनेस कोच बेक्की बराट का मामला बताता है कि कभी-कभी बिना किसी स्पष्ट जोखिम कारक के भी स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति सामने आ सकती है। बच्चे के जन्म के कुछ ही सप्ताह बाद उन्हें अचानक स्ट्रोक आया। उन्हें न तो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी और न ही धूम्रपान जैसी आदत।

बेक्की नियमित रूप से फिटनेस पर ध्यान देती थीं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाती थीं। ऐसे में अचानक स्ट्रोक आने की घटना उनके लिए और परिवार के लिए बेहद चौंकाने वाली थी। शुरुआत में उन्हें इस गंभीर स्थिति का अंदाजा भी नहीं था। हालांकि, समय पर चिकित्सा सहायता मिलने के कारण उनकी जान बच गई, लेकिन स्ट्रोक के बाद उनके शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।

प्रसव के बाद क्यों बढ़ सकती है चिंता?

गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है, जो शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कुछ परिस्थितियों में यही बदलाव रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर समस्या का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, हर प्रसव के बाद महिला को स्ट्रोक का खतरा नहीं होता। जोखिम कई व्यक्तिगत और चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए प्रसव के बाद किसी भी असामान्य लक्षण को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्ट्रोक के लक्षण पहचानना जरूरी

स्ट्रोक की स्थिति में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या समझने में परेशानी, अचानक चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना या देखने में दिक्कत जैसे लक्षण चेतावनी संकेत हो सकते हैं।

ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें तो इंतजार करने के बजाय तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। स्ट्रोक के मामले में उपचार शुरू होने में देरी से स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

युवाओं को भी रहना चाहिए सतर्क

बेक्की बराट का मामला यह याद दिलाता है कि कम उम्र और फिट दिखना किसी व्यक्ति को हर तरह की गंभीर बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाता। खासतौर पर प्रसव के बाद महिलाओं को अपने स्वास्थ्य में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञों की सलाह है कि अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी, चेहरे में बदलाव या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन जैसे संकेत दिखें तो इसे थकान या सामान्य कमजोरी मानकर टालना नहीं चाहिए। स्ट्रोक में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लेना सबसे जरूरी कदम है।

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