कैंसर का इलाज कई मरीजों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। बीमारी से लड़ने के साथ उन्हें कीमोथेरेपी और अन्य उपचारों के दुष्प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है। इनमें मितली और उल्टी की समस्या काफी आम है। कई मरीजों को कीमोथेरेपी के दौरान ही उल्टी होने लगती है, जबकि कुछ लोगों में यह परेशानी उपचार के कई घंटे या दिनों बाद भी दिखाई दे सकती है। अब इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय तक असर करने वाले ओन्डैनसेट्रॉन इंजेक्शन को लेकर अहम कदम उठाया गया है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ समिति ने ओन्डैनसेट्रॉन एक्सटेंडेड रिलीज इंजेक्टेबल सस्पेंशन 100 एमजी/1 एमएल के निर्माण और बाजार में बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की है। कंपनी की ओर से इस दवा के निर्माण और बिक्री का प्रस्ताव समिति के सामने रखा गया था।
कीमोथेरेपी से क्यों होती है मितली और उल्टी?
कुछ कीमोथेरेपी दवाएं शरीर की ऐसी कोशिकाओं और तंत्रों को प्रभावित करती हैं, जिनके कारण मस्तिष्क के उल्टी नियंत्रित करने वाले हिस्से को संकेत मिलने लगते हैं। इसके अलावा पेट और आंतों में होने वाले बदलाव भी मितली और उल्टी की समस्या को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, हर मरीज में इसका असर एक जैसा नहीं होता। दवा का प्रकार, उसकी खुराक, उपचार की प्रक्रिया और मरीज की शारीरिक स्थिति इसके जोखिम को प्रभावित कर सकती है।
ज्यादा उल्टी से बढ़ सकती हैं दूसरी परेशानियां
कीमोथेरेपी के बाद लगातार मितली या उल्टी होने से मरीज के लिए भोजन और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना मुश्किल हो सकता है। इससे शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और पोषण संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए कैंसर के इलाज में केवल बीमारी को नियंत्रित करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उपचार से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करना भी जरूरी माना जाता है।
लंबे असर वाले ओन्डैनसेट्रॉन इंजेक्शन की सिफारिश ऐसे मरीजों के लिए राहत की उम्मीद जगा सकती है, जिन्हें उपचार के बाद लगातार मितली और उल्टी की समस्या होती है। हालांकि, इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और मरीज की उपचार योजना के अनुसार ही किया जाना चाहिए। हर मरीज के लिए दवा की जरूरत और उपयुक्तता अलग हो सकती है।
कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों को किसी भी दवा या इंजेक्शन का इस्तेमाल खुद से नहीं करना चाहिए। उपचार से जुड़ा कोई भी फैसला संबंधित ऑन्कोलॉजिस्ट या चिकित्सक की सलाह से ही लिया जाना बेहतर है।
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