प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य मंत्रियों के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की। इस दौरान उन्होंने मंत्रियों से उनके मंत्रालय और विभाग से जुड़े कामकाज का ब्योरा लिया। बैठक में प्रधानमंत्री ने एक-एक मंत्री से सवाल किए और यह जानने की कोशिश की कि सरकार की योजनाओं और लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर क्या पहल की है।
आंकड़े गिनाने पर मंत्रियों को टोका
बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने अपने विभाग की उपलब्धियों और योजनाओं से जुड़े आंकड़े प्रधानमंत्री के सामने रखे। हालांकि, बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने केवल आंकड़े या सरकारी उपलब्धियां गिनाने पर जोर देने के बजाय मंत्रियों से उनके व्यक्तिगत योगदान के बारे में पूछा।
पीएम मोदी ने मंत्रियों से सवाल किया कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने खुद क्या किया है? इसका मकसद मंत्रियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और उनके स्तर पर किए गए प्रयासों को समझना बताया जा रहा है।
काम का हिसाब देने पर रहा जोर
बैठक में मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और मंत्रालयों के काम का सीधा असर आम जनता की जिंदगी में दिखाई दे।
मंत्रियों से अपेक्षा की गई कि वे अपने विभाग के लक्ष्यों को पूरा करने के साथ-साथ नए विचारों और बेहतर कार्यप्रणाली पर भी ध्यान दें। सरकार के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मंत्रालयों के बीच समन्वय और तेजी से काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
विकसित भारत के लक्ष्य पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी लगातार विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर सरकार के कामकाज पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में राज्य मंत्रियों के साथ हुई यह बैठक भी इसी व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखी जा रही है।
बैठक में मंत्रियों से यह समझने की कोशिश की गई कि वे अपने-अपने विभाग के जरिए देश के विकास में किस तरह योगदान दे रहे हैं। केवल योजनाओं की घोषणा या आंकड़ों के बजाय उनके वास्तविक प्रभाव को महत्व देने का संदेश दिया गया।
संभावित कैबिनेट विस्तार से पहले बैठक अहम
राज्य मंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की यह लंबी बैठक राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसे संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले की समीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
माना जा रहा है कि मंत्रियों के प्रदर्शन, उनकी कार्यशैली और जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर पार्टी और सरकार के स्तर पर आकलन किया जा सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री की ओर से मंत्रियों से सीधे सवाल-जवाब किए जाने को काफी अहम माना जा रहा है।
बैठक का संदेश साफ रहा कि सरकार के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल आंकड़े पेश करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मंत्रियों को अपने स्तर पर ठोस पहल और परिणाम भी दिखाने होंगे।
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