सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ड्रोन हमले के बाद बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल उत्पादन और निर्यात ढांचे का अहम हिस्सा है। इसके बाधित होने से कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर कितना पड़ेगा।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को देश के पश्चिमी तट से जोड़ती है। इसका इस्तेमाल तेल को पश्चिमी तट तक पहुंचाने के लिए किया जाता है, जहां से उसे लाल सागर के रास्ते आगे भेजा जा सकता है। पाइपलाइन की लंबाई और इसकी रणनीतिक भूमिका इसे सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है।
ड्रोन हमले के बाद इसके संचालन पर असर पड़ने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा हुई है। उपलब्ध आकलनों के मुताबिक, अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4 फीसदी तक हिस्सा प्रभावित होने का जोखिम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक असर हमले से हुए नुकसान, मरम्मत में लगने वाले समय और सऊदी अरब द्वारा वैकल्पिक निर्यात व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
भारत पर इसका संभावित असर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों के जरिए देखने को मिल सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ परिवहन और माल ढुलाई की लागत पर भी पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में लगातार तेजी रहने पर इसका व्यापक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। महंगा ईंधन परिवहन लागत बढ़ाता है और इसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। वहीं, भारत का तेल आयात बिल बढ़ने से देश के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा पर भी दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, भारत पर तत्काल कितना असर होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा। सऊदी अरब की वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था, पाइपलाइन को दोबारा चालू करने में लगने वाला समय, वैश्विक तेल भंडार और दूसरे तेल उत्पादक देशों की अतिरिक्त आपूर्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसलिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि पाइपलाइन कितने समय तक बंद रहती है। अगर व्यवधान सीमित अवधि का रहता है तो वैश्विक बाजार इसका असर संभाल सकता है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित होने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भारत समेत दुनिया के कई तेल आयातक देशों के लिए चुनौती बन सकता है।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ