World Rabies Day: Rabies Vaccine: कुत्ते या किसी अन्य संभावित संक्रमित जानवर के काटने के बाद रेबीज से बचाव के लिए समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है। रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैल सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रेबीज के लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक बार बीमारी के नैदानिक लक्षण शुरू हो जाने के बाद यह लगभग हमेशा जानलेवा होती है।
काटने के कितने समय बाद टीका लगवाएं?
कुत्ते के काटने या खरोंच लगने के बाद रेबीज की वैक्सीन जितनी जल्दी संभव हो, उतनी जल्दी लगवानी चाहिए। इसके लिए किसी निश्चित 24 या 48 घंटे की समय-सीमा का इंतजार करना सही नहीं है। घटना के बाद देर हो गई हो, तब भी चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर घाव की स्थिति, जानवर के संपर्क और पहले लगे रेबीज टीकों के इतिहास के आधार पर उपचार तय करते हैं।
सबसे पहले घाव को अच्छी तरह धोएं
काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और बहते पानी से करीब 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद, यदि उपलब्ध हो, तो उचित एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। घाव को कसकर बांधने या घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय जल्द से जल्द अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना जरूरी है।
हर मामले में सिर्फ वैक्सीन ही काफी है?
यह काटने की प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि जानवर की लार टूटी त्वचा, खरोंच या आंख-मुंह जैसे संवेदनशील हिस्से के संपर्क में आई है, तो डॉक्टर इसे रेबीज के जोखिम के अनुसार वर्गीकृत कर सकते हैं। कुछ गंभीर एक्सपोजर में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) की भी जरूरत पड़ सकती है। इसे घाव के आसपास दिया जाता है और यह वैक्सीन से अलग उपचार है।
अगर व्यक्ति को पहले से रेबीज का पूरा टीकाकरण हो चुका है, तो उपचार का तरीका अलग हो सकता है। इसलिए खुद से वैक्सीन की डोज तय करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
लक्षणों का इंतजार क्यों नहीं करना चाहिए?
रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और काटे गए स्थान पर दर्द या असामान्य झनझनाहट शामिल हो सकते हैं। आगे चलकर निगलने में परेशानी, पानी से डर, भ्रम और तंत्रिका तंत्र से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लेकिन इन लक्षणों के सामने आने तक इंतजार करना बेहद जोखिम भरा है।
इसलिए कुत्ते के काटने पर सबसे जरूरी कदम है—घाव तुरंत धोएं, जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र जाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) शुरू कराएं। साथ ही, संभव हो तो काटने वाले जानवर के बारे में जानकारी स्वास्थ्यकर्मियों को दें, लेकिन उसकी निगरानी के चक्कर में अपना इलाज टालें नहीं।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ