Latest Study: वैज्ञानिकों ने एक ऐसे आनुवंशिक रहस्य का पता लगाया है, जिसने वायरस और इंसानी जीन के बीच संबंध को लेकर नई जानकारी सामने रखी है। शोधकर्ताओं को एक मानव आनुवंशिक तत्व BC200 एक ऐसे पॉक्सवायरस में मिला है, जो इंसानों को संक्रमित करता है। खास बात यह है कि यह आनुवंशिक तत्व केवल वायरस के भीतर मौजूद नहीं है, बल्कि खुद को जीनोम में एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की क्षमता भी बनाए हुए है। यह शोध Science जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
करीब एक लाख साल पहले वायरस तक पहुंचा जीन
शोध के मुताबिक, BC200 की उत्पत्ति लगभग 4 करोड़ साल पहले प्राइमेट्स के एक पूर्वज में मौजूद एक प्राचीन 'जंपिंग जीन' यानी ट्रांसपोजेबल एलिमेंट से हुई थी। बाद में यह तत्व मानव और संबंधित प्राइमेट्स में एक महत्वपूर्ण गैर-कोडिंग RNA के रूप में काम करने लगा।
वैज्ञानिकों ने पाया कि आधुनिक इंसानों के इतिहास के दौरान BC200 ने मोलस्कम कॉन्टेजियोसम वायरस (MCV) के जीनोम में कम से कम दो बार प्रवेश किया। इन घटनाओं का अनुमान लगभग एक लाख साल पहले का लगाया गया है।
'जंपिंग जीन' आखिर क्या होता है?
ट्रांसपोजेबल एलिमेंट ऐसे DNA तत्व होते हैं, जो जीनोम में अपनी स्थिति बदल सकते हैं। इन्हें आम भाषा में 'जंपिंग जीन' कहा जाता है। इंसानी DNA का बड़ा हिस्सा ऐसे तत्वों के पुराने अवशेषों से बना है, हालांकि इनमें से अधिकांश अब सक्रिय नहीं हैं।
BC200 इसलिए खास है क्योंकि यह एक तरफ कोशिकाओं, खासकर न्यूरॉन्स, में भूमिका निभाने वाला आनुवंशिक तत्व है और दूसरी तरफ इसमें जीनोम में स्थान बदलने की क्षमता भी बनी हुई है।
इंसानी शरीर पर क्या असर हो सकता है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि BC200 की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह न्यूरॉन्स में मैसेंजर RNA से प्रोटीन बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में शामिल हो सकता है। यह जर्म सेल्स यानी शुक्राणु और अंडाणु में भी कम मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसके कुछ नए इंसर्शन अगली पीढ़ी तक पहुंच सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि BC200 कुछ ट्यूमर में असामान्य रूप से व्यक्त होता है और अल्जाइमर रोग से जुड़े मस्तिष्क के नमूनों में इसका स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि BC200 सीधे इन बीमारियों का कारण है। इसके संभावित प्रभावों को समझने के लिए आगे शोध की जरूरत है।
वायरस और इंसानी जीन के रिश्ते पर नई जानकारी
यह खोज इस बात का उदाहरण है कि वायरस और उनके मेजबान जीवों के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान कितना जटिल हो सकता है। इससे पहले के शोधों में भी पाया गया है कि पॉक्सवायरस कभी-कभी अपने मेजबान से जीन हासिल कर सकते हैं और इसमें LINE-1 आधारित रेट्रोट्रांसपोजिशन की भूमिका हो सकती है।
अब वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि MCV ने BC200 को किस तरह हासिल किया और क्या वायरस इस आनुवंशिक तत्व का इस्तेमाल संक्रमित कोशिकाओं में किसी तरह करता है। साथ ही, BC200 की 'जंपिंग' क्षमता का कैंसर जैसी स्थितियों से कोई वास्तविक संबंध है या नहीं, यह भी आगे की रिसर्च का महत्वपूर्ण विषय रहेगा।
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