चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहुसदस्यीय चुनाव आयोग में लिए जाने वाले फैसले सामूहिक रूप से होने चाहिए और किसी एक सदस्य द्वारा अकेले निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत के समक्ष आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
विकास सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले महत्वपूर्ण फैसले या तो सर्वसम्मति से या फिर बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। याचिका में इसी प्रक्रिया का पालन किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ फैसले आयोग के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों सहित कुछ निर्णयों को लेकर आयोग के भीतर अलग-अलग राय दर्ज की गई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों और रिपोर्टों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग का कहना है कि सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार या टिप्पणियां होना deliberative process का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और व्यक्तिगत टिप्पणियों को आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।
याचिका में आयोग के फैसले लेने के तरीके और संवैधानिक प्रावधानों के पालन को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनाव आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल भी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में याचिका में उठाए गए सवालों पर सुनवाई करेगा। अदालत के समक्ष मुख्य मुद्दों में यह भी शामिल होगा कि बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के अधिकारों और जिम्मेदारियों का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से लगाए गए जवाब और याचिकाकर्ता के तर्कों पर भी विचार किया जाएगा।
फिलहाल, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अगले सप्ताह होने वाले विचार-विमर्श पर नजर रहेगी। अदालत की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि याचिका में उठाए गए निर्णय प्रक्रिया से जुड़े कानूनी सवालों पर आगे किस तरह की कार्रवाई की जाती है

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