वंदे मातरम के पूरे संस्करण को अनिवार्य करने के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब


 वंदे मातरम के पूरे छह अंतरों के गायन को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका संगीतकार और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता टीएम कृष्णा की ओर से दायर की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह यह तय करने के लिए नहीं बैठी है कि राष्ट्रीय गीत में कितने अंतरे होने चाहिए, लेकिन गीत न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं, इस कानूनी सवाल की जांच की जा सकती है।

याचिका में वंदे मातरम के छह अंतरों के आधिकारिक संस्करण और उसके गायन से जुड़े प्रावधानों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। उनका तर्क है कि गीत के कुछ अंतरों में धार्मिक संदर्भ होने के कारण सभी नागरिकों को इसे गाने के लिए बाध्य करना संवैधानिक अधिकारों के सवाल खड़े करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि किसी व्यक्ति के धार्मिक आधार पर वंदे मातरम न गाने को लेकर आपराधिक कार्रवाई का सवाल अलग से विचारणीय है। अदालत ने पूर्व के बिजोय इमैनुएल मामले का भी संदर्भ दिया, जिसमें धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान न गाने से जुड़े मामले में मौलिक अधिकारों पर विचार किया गया था।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब वंदे मातरम के आधिकारिक संस्करण को लेकर केंद्र और कुछ राज्यों के बीच भी अलग-अलग रुख सामने आए हैं। जुलाई 2026 में गृह मंत्रालय ने राज्यों को आधिकारिक छह-अंतरे वाले संस्करण के सामूहिक गायन से संबंधित निर्देश जारी किए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने अपने सरकारी कार्यक्रमों में सामान्य तौर पर केवल पहले दो अंतरे गाने का आदेश जारी किया, जिसे लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई।

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि वंदे मातरम के गायन को लेकर बनाए गए प्रावधानों की संवैधानिक सीमा क्या है और किसी व्यक्ति को इसे न गाने पर दंडित किया जा सकता है या नहीं। केंद्र का जवाब आने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही की दिशा स्पष्ट होगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ