अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान और तुर्किए की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। 19 सितंबर 2026 को दिए गए अपने बयान में मैकमास्टर ने पाकिस्तान की ओर से समझौते की प्रतिबद्धताओं को निभाने को लेकर संदेह जताया। उनकी टिप्पणियां उनका व्यक्तिगत आकलन हैं और उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया है।
क्या है मक्का रक्षा समझौता?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना बताया गया है।
समझौते में रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ सैन्य समन्वय, संयुक्त अभ्यास और विभिन्न रक्षा क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में काम करने की बात कही गई है। 31 अगस्त को इस्तांबुल में गठबंधन की पहली बैठक हुई, जिसमें सऊदी अरब में सचिवालय स्थापित करने पर सहमति बनी। शुरुआत में इसकी जिम्मेदारी तीन साल के लिए पाकिस्तान के पास रहेगी।
पाकिस्तान की भूमिका पर मैकमास्टर ने क्या कहा?
मैकमास्टर ने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा कि अब यह देखना होगा कि वह मक्का समझौते में किए गए दायित्वों को किस तरह निभाता है। उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की और समझौते की व्यावहारिक प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते के पीछे आर्थिक हितों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, यह उनका आकलन है, न कि समझौते में दर्ज कोई आधिकारिक उद्देश्य।
पाकिस्तान ने दूसरी ओर समझौते को सामूहिक प्रतिरोध और रक्षा के लिए बनाया गया करार बताया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने 16 सितंबर को कहा कि इसका कोई क्षेत्रीय विस्तारवादी उद्देश्य नहीं है और यह रक्षात्मक प्रकृति का है।
तुर्किए को लेकर भी उठाए सवाल
मैकमास्टर ने तुर्किए की मौजूदा सरकार की नीतियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना तुर्किए के लोगों के बजाय राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की सरकार और उसकी नीतियों को लेकर है। उन्होंने तुर्किए के क्षेत्रीय संबंधों और नीतिगत रुख पर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं।
हालांकि, तुर्किए और पाकिस्तान दोनों की ओर से मक्का समझौते को किसी खास देश के खिलाफ गठबंधन नहीं बताया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी इसे रक्षात्मक प्रकृति का बताया था और कहा था कि यह किसी देश के खिलाफ निर्देशित नहीं है।
समझौते की असली परीक्षा आगे
मक्का रक्षा समझौता तीन देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप देता है, लेकिन इसके सामूहिक रक्षा प्रावधानों की वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावशीलता अभी पूरी तरह परखी नहीं गई है। पाकिस्तान ने हाल में कहा है कि वह समझौते को उसकी भावना और उद्देश्य के अनुरूप लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसलिए मक्का पैक्ट को लेकर मैकमास्टर की टिप्पणियां जहां समझौते की विश्वसनीयता और पाकिस्तान-तुर्किए की भूमिका पर सवाल उठाती हैं, वहीं तीनों सदस्य देश इसे क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सामूहिक प्रतिरोध से जुड़ा रक्षात्मक समझौता बताते हैं।
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