अमेरिका से बढ़ती तनातनी के बीच कनाडा यूरोप के करीब क्यों जा रहा है?


 EU ने कनाडा को ‘सहयोगी सदस्य’ बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके पीछे व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।

कनाडा और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव का असर अब दोनों देशों के रिश्तों से आगे दिखाई देने लगा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला ‘सहयोगी सदस्य’ (Associate Member) बनाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, यह दर्जा फिलहाल EU की संधियों में मौजूद नहीं है और इसकी कानूनी रूपरेखा भी तय नहीं हुई है।

कनाडा यूरोप के करीब क्यों आ रहा है?

कनाडा की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिका के बाजार पर काफी निर्भर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा के करीब 70 फीसदी निर्यात का गंतव्य अमेरिका है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक दबाव के बीच ओटावा अपने व्यापारिक और रणनीतिक विकल्पों को बढ़ाना चाहता है। प्रधानमंत्री कार्नी ने यूरोप के साथ व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है।

कनाडा और EU के बीच पहले से ही CETA नाम का मुक्त व्यापार समझौता है। प्रस्तावित नई साझेदारी का उद्देश्य मौजूदा व्यापार संबंधों से आगे बढ़कर निवेश, तकनीक, रक्षा उद्योग, ऊर्जा सुरक्षा और आर्कटिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाना हो सकता है।

‘सहयोगी सदस्य’ बनने का क्या मतलब है?

यह पूर्ण EU सदस्यता नहीं होगी। कनाडा यूरोपीय संघ का हिस्सा बने बिना कुछ क्षेत्रों में यूरोपीय ढांचे के साथ अधिक गहराई से जुड़ सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसे सिंगल मार्केट तक कितनी पहुंच मिलेगी, यूरोपीय नियमों को किस हद तक अपनाना होगा या नागरिकों के लिए काम और पढ़ाई जैसी सुविधाएं मिलेंगी या नहीं। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए EU के सदस्य देशों की सहमति भी जरूरी होगी।

अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने EU के इस प्रस्ताव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह कदम ‘शत्रुतापूर्ण’ लगा तो अमेरिका यूरोप पर ‘बहुत गंभीर टैरिफ’ लगा सकता है या कुछ मामलों में व्यापार रोकने की कार्रवाई कर सकता है।

आगे की राह आसान नहीं

कनाडा के लिए यूरोप के साथ गहरे रिश्ते बनाना कई अवसर खोल सकता है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ‘सहयोगी सदस्य’ का दर्जा अभी कानूनी रूप से परिभाषित नहीं है और EU के भीतर भी इस प्रस्ताव को लेकर सवाल उठे हैं। इसके अलावा कनाडा की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था का अमेरिका से गहरा जुड़ाव है। इसलिए यूरोप के साथ नजदीकी बढ़ने का मतलब अमेरिका से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं माना जा सकता।

कुल मिलाकर, कनाडा का यूरोप की ओर बढ़ता कदम बदलते वैश्विक समीकरणों में अपने व्यापार और रणनीतिक विकल्पों को व्यापक बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, इस पहल ने अमेरिका-कनाडा और अमेरिका-EU संबंधों में एक नया कूटनीतिक तनाव भी पैदा कर दिया है। 

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