भारत और चीन के बीच हाल के दिनों में कूटनीतिक संबंधों में नरमी के संकेतों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड की गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इस समूह ने मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव अभियानों को अधिक तेज, प्रभावी और बेहतर समन्वित बनाना है।
क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ते हुए आपातकालीन परिस्थितियों में साझा संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। इसी क्रम में टोक्यो में एक महत्वपूर्ण अभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें चारों देशों के प्रतिनिधियों ने प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत सामग्री, परिवहन और अन्य जरूरी संसाधनों की आवाजाही को बेहतर बनाने के तरीकों पर काम किया।
अभ्यास के दौरान संकट की स्थिति में लॉजिस्टिक्स संसाधनों के साझा इस्तेमाल, आपातकालीन प्रतिक्रिया और मानवीय सहायता के समन्वय को लेकर विभिन्न प्रक्रियाओं का परीक्षण किया गया। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के किसी देश में भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी या अन्य बड़ी प्राकृतिक आपदा आने पर राहत पहुंचाने में समय कम लगे और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सके।
IPLN के तहत क्वाड देशों के बीच लॉजिस्टिक्स क्षमता को एक-दूसरे के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री, परिवहन सुविधाओं और अन्य जरूरी सहायता को तेजी से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने का अवसर भी मिलेगा।
क्वाड के इस प्रयास को क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है और यहां कई देश नियमित रूप से चक्रवात, बाढ़, भूकंप और सुनामी जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे में चार प्रमुख देशों के बीच बेहतर समन्वय से मानवीय सहायता अभियानों की क्षमता बढ़ सकती है।
भारत के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। भारत पहले भी आपदा राहत और मानवीय सहायता के अभियानों में सक्रिय रहा है। क्वाड के माध्यम से इस क्षमता को क्षेत्रीय स्तर पर और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, भारत-चीन संबंधों में कूटनीतिक नरमी के बीच क्वाड का आपदा राहत और लॉजिस्टिक्स सहयोग पर ध्यान देना बताता है कि समूह क्षेत्रीय सहयोग के व्यावहारिक क्षेत्रों में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। IPLN के संस्थागत रूप लेने से भविष्य में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपदा के समय साझा प्रतिक्रिया और राहत कार्यों को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने में मदद मिल सकती है।

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