ब्रिक्स समिट: पुतिन-जिनपिंग की कारों में क्या है खास? जानें क्यों कहलाती हैं ‘चलता-फिरता किला’


 ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के लिए दुनिया की नजरें इस समय राजधानी दिल्ली पर टिकी हैं। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ उनकी विशेष बख्तरबंद कारें भी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। इन वाहनों को उनकी अत्याधुनिक सुरक्षा खूबियों के कारण अक्सर ‘चलता-फिरता किला’ कहा जाता है।

राष्ट्रपति पुतिन की आधिकारिक कार को रूस की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह एक बेहद मजबूत आर्मर्ड लिमोजिन है, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कार की बॉडी और शीशे सामान्य वाहनों की तुलना में काफी मजबूत होते हैं। इसका उद्देश्य गोलीबारी, विस्फोट और अन्य संभावित खतरों के दौरान कार के अंदर मौजूद लोगों को अधिकतम सुरक्षा देना है।

पुतिन की कार को रूस की ऑरस (Aurus) सीनेट लिमोजिन के तौर पर जाना जाता है। इसमें शक्तिशाली इंजन के साथ आधुनिक सुरक्षा और संचार सुविधाएं दी गई हैं। कार का डिजाइन भी इस तरह तैयार किया गया है कि यह देखने में एक लग्जरी कार जैसी लगे, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से बेहद मजबूत हो।

वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आधिकारिक कार भी सुरक्षा के मामले में बेहद खास मानी जाती है। चीन की राष्ट्रपति कार को विशेष रूप से उच्चस्तरीय सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें मजबूत बॉडी, सुरक्षा-केंद्रित ग्लास और आधुनिक संचार प्रणालियों जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं।

इन दोनों नेताओं की कारों में सुरक्षा का स्तर इतना ऊंचा रखा जाता है कि इन्हें सामान्य लग्जरी कारों से अलग माना जाता है। हालांकि, सोशल मीडिया और कई रिपोर्टों में इन वाहनों को ‘परमाणु बम तक से सुरक्षित’ जैसे दावों के साथ पेश किया जाता है, लेकिन ऐसे दावों को शाब्दिक रूप से सही मानना उचित नहीं है। इनका वास्तविक सुरक्षा डिजाइन और क्षमता पूरी तरह सार्वजनिक नहीं होती।

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इन हाई-सिक्योरिटी वाहनों की मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है। दुनिया के दो प्रभावशाली नेताओं के लिए इस्तेमाल होने वाली ये कारें सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यही वजह है कि इन्हें अक्सर ‘पहियों पर चलता-फिरता किला’ कहा जाता है।

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