एपल शुरू करने से पहले भारत क्यों आए थे स्टीव जॉब्स? ऐसे मिली ‘हनुमान अंश’ बनाने की प्रेरणा


 कम बजट में बनी फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर बड़ा मुकाम हासिल करना हमेशा चर्चा का विषय बन जाता है। ऐसी ही एक कहानी फिल्म ‘हनुमान अंश’ से सामने आई है। करीब दो करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। फिल्म की सफलता के साथ इसकी प्रेरणा की कहानी भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा से जुड़ी कहानी

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी एपल की नींव रखने वाले स्टीव जॉब्स भारत से काफी प्रभावित थे। युवावस्था में वे आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में भारत आए थे। बताया जाता है कि इस दौरान उनका उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और साधना को करीब से समझना था।

भारत यात्रा के दौरान स्टीव जॉब्स उत्तराखंड के नैनीताल क्षेत्र में स्थित नीम करौली बाबा के आश्रम भी पहुंचे थे। हालांकि, वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि बाबा का निधन हो चुका है। इसके बावजूद नीम करौली बाबा और उनके विचारों का जॉब्स पर गहरा प्रभाव पड़ा।

बाद में स्टीव जॉब्स ने भारतीय आध्यात्मिकता से मिली सीख को अपने जीवन और सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। यही वजह है कि उनकी भारत यात्रा आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई है।

21 साल की अनुप्रिया नागर को कैसे मिली फिल्म की प्रेरणा?

‘हनुमान अंश’ की कहानी की सबसे खास बात यह है कि इसके पीछे एक युवा फिल्म निर्माता की सोच बताई जाती है। महज 21 साल की अनुप्रिया नागर ने स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा और नीम करौली बाबा से जुड़ी कहानी से प्रेरणा लेकर फिल्म बनाने के बारे में सोचा।

उनका उद्देश्य सिर्फ एक फिल्म बनाना नहीं था, बल्कि भारतीय आध्यात्मिकता, आस्था और आधुनिक सोच के बीच संबंध को कहानी के माध्यम से दर्शाना भी था। इसी विचार ने आगे चलकर ‘हनुमान अंश’ का रूप लिया।

छोटे बजट से बड़ी सफलता तक

करीब दो करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म का 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई तक पहुंचना इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। फिल्म की सफलता यह भी दिखाती है कि मजबूत कहानी और दर्शकों से जुड़ा विषय बड़े बजट के बिना भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।

‘हनुमान अंश’ के जरिए स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा से जुड़ी कहानी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एक ओर जहां जॉब्स की आध्यात्मिक खोज प्रेरणा देती है, वहीं दूसरी ओर अनुप्रिया नागर की कम उम्र में फिल्म बनाने की कोशिश और उसकी सफलता भी लोगों के लिए मिसाल बनती दिखाई देती है।

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