ना फर्जी पहचान, ना घिसे फिंगरप्रिंट्स का झंझट: आ गया है Bharat ABIS; क्या है यह और कैसे पकड़ेगा डुप्लीकेट आईडी?


 भारत में बड़े पैमाने पर पहचान सत्यापन और डुप्लीकेट पहचान की समस्या से निपटने के लिए एक नया मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक सिस्टम विकसित किया गया है। इसका नाम Bharat ABIS है। UIDAI से जुड़े शोधकर्ताओं और अन्य विशेषज्ञों की टीम ने इसे ऐसे सिस्टम के रूप में विकसित किया है, जो बड़े बायोमेट्रिक डेटाबेस में किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड को तेजी से खोजने और डुप्लीकेट रिकॉर्ड का पता लगाने में मदद कर सकता है। शोधकर्ताओं ने इसके डिजाइन में ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया है।

क्या है Bharat ABIS?

ABIS यानी Automated Biometric Identification System ऐसा सिस्टम है जो किसी व्यक्ति के बायोमेट्रिक डेटा की तुलना बड़े डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से करता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि संबंधित व्यक्ति का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड पहले से डेटाबेस में मौजूद है या नहीं।

Bharat ABIS को खास तौर पर बड़े पैमाने पर 1 सर्च और डिडुप्लीकेशन के लिए तैयार किया गया है। यानी एक व्यक्ति के बायोमेट्रिक डेटा को डेटाबेस में मौजूद बड़ी संख्या में रिकॉर्ड से मिलाकर संभावित मैच तलाशे जा सकते हैं।

तीन तरह के बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल

इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें केवल फिंगरप्रिंट पर निर्भर रहने के बजाय तीन बायोमेट्रिक माध्यमों को शामिल किया गया है—फिंगरप्रिंट, चेहरा और आईरिस। प्रत्येक माध्यम के डेटा को अलग-अलग प्रोसेस किया जाता है और इसके बाद उन्हें एक संयुक्त बायोमेट्रिक टेम्पलेट में जोड़ा जाता है।

इसका फायदा उन मामलों में हो सकता है, जहां किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट की गुणवत्ता खराब हो, उंगली पर चोट हो या बायोमेट्रिक डेटा का कोई एक माध्यम उपलब्ध न हो। सिस्टम में क्वालिटी असेसमेंट और प्रेजेंटेशन अटैक डिटेक्शन जैसे चरण भी शामिल हैं।

अरबों रिकॉर्ड में कैसे खोजेगा?

इतने बड़े डेटाबेस में किसी एक व्यक्ति का संभावित मैच तलाशना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। Bharat ABIS में अलग-अलग बायोमेट्रिक मॉड्यूल से फीचर निकालकर उन्हें एक संयुक्त टेम्पलेट में बदला जाता है। इसके बाद सर्च सिस्टम संभावित मिलान खोजता है और बड़े पैमाने पर डेटा को संभालने के लिए अलग-अलग सर्वरों के बीच काम वितरित किया जाता है।

शोध में 1.55 अरब Aadhaar रिकॉर्ड में से चुने गए 22 करोड़ रिकॉर्ड के डेटाबेस पर सिस्टम का मूल्यांकन किया गया। वयस्क रिकॉर्ड के परीक्षण में 0.5 प्रतिशत FPIR पर 0.3 प्रतिशत FNIR दर्ज किया गया।

घिसे फिंगरप्रिंट में भी मदद

UIDAI पहले से ही फिंगरप्रिंट और आईरिस के साथ चेहरे को भी बायोमेट्रिक डिडुप्लीकेशन में इस्तेमाल करता रहा है। UIDAI के अनुसार, मौजूदा सिस्टम खराब गुणवत्ता वाले बायोमेट्रिक्स के साथ-साथ कुछ असामान्य बायोमेट्रिक स्थितियों की पहचान में भी सक्षम है।

Bharat ABIS का विकास बड़े पैमाने पर डिडुप्लीकेशन को अधिक स्वदेशी और ओपन-सोर्स तकनीकी ढांचे के साथ संभालने की दिशा में शोध प्रयास के रूप में सामने आया है। हालांकि, किसी भी बायोमेट्रिक सिस्टम में गलत मैच और गलत तरीके से मैच न मिलने की संभावना को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं माना जाता। इसलिए अंतिम पहचान संबंधी फैसलों में अतिरिक्त जांच और सत्यापन महत्वपूर्ण रहते हैं।

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