Trump-Xi Meeting: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 सितंबर को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंचे। वॉशिंगटन के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकॉल से हटकर खुद शी जिनपिंग का स्वागत किया। ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का रेड कार्पेट पर स्वागत किया। समारोह में सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और अमेरिकी व चीनी झंडों के साथ सम्मान गारद भी मौजूद रहा। इसी दौरान B-1 बॉम्बर विमानों ने फ्लाईओवर किया।
ट्रंप ने एयरपोर्ट पर खुद क्यों किया स्वागत?
किसी विदेशी नेता का ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्वागत करना असामान्य है। इस बार ट्रंप ने शी जिनपिंग के स्वागत के लिए यह कदम उठाया। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे दोनों देशों के रिश्तों में इस यात्रा के महत्व का संकेत मिलता है। शी का यह अमेरिका दौरा 2015 के बाद पहली राजकीय यात्रा है।
यह स्वागत केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा। लाल कालीन, सैन्य सम्मान और B-1 बॉम्बर फ्लाईओवर के जरिए समारोह को काफी भव्य बनाया गया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अगले दिन व्हाइट हाउस में औपचारिक बातचीत का कार्यक्रम तय था।
व्यापार समझौता सबसे अहम मुद्दों में
शी की यात्रा से पहले अमेरिका और चीन ने मौजूदा व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह समझौता पहले नवंबर में समाप्त होने वाला था, जिसे अब जनवरी तक बढ़ाया गया है। दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में टैरिफ और व्यापार से जुड़े विवाद काफी बढ़े थे। ऐसे में व्यापार संबंधों को स्थिर रखना वार्ता का प्रमुख मुद्दा है।
अमेरिका की ओर से चीन से दुर्लभ खनिजों और रणनीतिक संसाधनों की आपूर्ति, व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। वहीं, चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद और व्यापारिक संबंधों को स्थिर रखने पर बातचीत कर सकता है।
एआई और तकनीक पर भी होगी बातचीत
अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर प्रतिस्पर्धा भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। दोनों पक्ष एआई से जुड़े जोखिमों और सुरक्षा को लेकर संवाद की संभावनाओं पर चर्चा कर सकते हैं। अमेरिका अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखना चाहता है, जबकि चीन एआई क्षेत्र में अपने विकास पर प्रतिबंधों को लेकर चिंतित है।
ताइवान और ईरान का मुद्दा भी अहम
वार्ता में ताइवान का मुद्दा भी संवेदनशील रहने की संभावना है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग करता है। इसके अलावा ईरान, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल हो सकते हैं।
इस तीन दिवसीय यात्रा में व्यापार, तकनीक, एआई, दुर्लभ खनिज, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी। इसलिए ट्रंप का भव्य स्वागत जहां दोनों देशों के रिश्तों के महत्व को दर्शाता है, वहीं असली तस्वीर नेताओं की बैठकों और बातचीत से सामने आएगी।
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