बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बढ़ी चिंता, AI और सोशल मीडिया को लेकर UNICEF की रिपोर्ट ने चेताया


 आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, मनोरंजन, जानकारी हासिल करने और दोस्तों से जुड़ने के लिए बच्चे तेजी से स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, ऑनलाइन दुनिया की बढ़ती पहुंच के साथ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल ने इन चिंताओं को और गंभीर बना दिया है।

बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की हालिया रिपोर्ट ने ऑनलाइन दुनिया में मौजूद जोखिमों पर ध्यान खींचा है। रिपोर्ट में बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल के दौरान उनकी सुरक्षा, निजता और मानसिक भलाई को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। खासतौर पर सोशल मीडिया और AI आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

सोशल मीडिया पर बढ़ते खतरे

सोशल मीडिया बच्चों को दूसरों से जुड़ने और अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर देता है, लेकिन इसके साथ कई तरह के जोखिम भी मौजूद हैं। साइबरबुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, अनुचित सामग्री और अजनबियों से संपर्क जैसे खतरे बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं।

कम उम्र के बच्चे कई बार ऑनलाइन सामने आने वाली सामग्री और लोगों की वास्तविकता को सही तरीके से समझ नहीं पाते। ऐसे में उन्हें बहकाने या गलत जानकारी देने की संभावना बढ़ सकती है। माता-पिता और अभिभावकों के लिए बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को समझना इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

AI ने बढ़ाई नई चुनौती

AI तकनीक के तेजी से विस्तार ने बच्चों के लिए ऑनलाइन अनुभव को बदल दिया है। AI आधारित चैटबॉट, जनरेटिव AI और दूसरी डिजिटल सेवाएं बच्चों के लिए पढ़ाई और जानकारी हासिल करने में उपयोगी हो सकती हैं। लेकिन इनके गलत इस्तेमाल से गलत सूचना, अनुचित सामग्री और निजता से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।

बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि इंटरनेट पर मिलने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। उन्हें अपनी निजी जानकारी, फोटो, पासवर्ड और लोकेशन जैसी संवेदनशील चीजें अनजान लोगों या संदिग्ध प्लेटफॉर्म के साथ साझा करने से बचना चाहिए।

अभिभावकों की भूमिका अहम

बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना व्यावहारिक समाधान नहीं है। इसके बजाय उन्हें सुरक्षित और जिम्मेदारी से इंटरनेट इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए और किसी भी ऑनलाइन परेशानी की स्थिति में उनसे बात करने के लिए सुरक्षित माहौल देना चाहिए।

UNICEF की रिपोर्ट से यह संदेश मिलता है कि तकनीक के विकास के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। सरकारों, टेक कंपनियों, स्कूलों और अभिभावकों को मिलकर ऐसा डिजिटल वातावरण तैयार करना होगा, जहां बच्चे इंटरनेट के फायदे उठा सकें और ऑनलाइन खतरों से भी सुरक्षित रह सकें।

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