डिजिटल फ्रॉड पर एयरटेल का वार: 98.4 अरब स्पैम कॉल और 4.4 अरब मैसेज किए ब्लॉक


 Airtel AI Safe Network: डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच भारती एयरटेल ने अपने AI आधारित नेटवर्क सिक्योरिटी सिस्टम की उपलब्धियां साझा की हैं। कंपनी के मुताबिक, इस सिस्टम ने बड़ी संख्या में संदिग्ध कॉल, स्पैम मैसेज और खतरनाक लिंक की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया है। इसका उद्देश्य मोबाइल यूजर्स को डिजिटल ठगी और साइबर खतरों से बचाने के लिए नेटवर्क स्तर पर सुरक्षा मजबूत करना है।

98.4 अरब स्पैम कॉल की पहचान

एयरटेल के अनुसार, उसके AI आधारित सिस्टम ने 98.4 अरब से अधिक स्पैम कॉल की पहचान की। इनमें ऐसे कॉल शामिल थे, जिन्हें सिस्टम ने संभावित रूप से संदिग्ध या अनचाहा माना। कंपनी का दावा है कि AI तकनीक की मदद से नेटवर्क पर आने वाले कॉल पैटर्न का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों को तेजी से पहचाना जा रहा है।

स्पैम कॉल के जरिए साइबर अपराधी अक्सर लोगों को फर्जी बैंकिंग, KYC अपडेट, इनाम या अन्य लालच देकर संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए उकसाते हैं। ऐसे में नेटवर्क स्तर पर संदिग्ध कॉल की पहचान करना यूजर्स की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

4.4 अरब स्पैम मैसेज पर भी कार्रवाई

कंपनी ने बताया कि AI सिस्टम ने 4.4 अरब से अधिक स्पैम मैसेज की भी पहचान की। SMS के जरिए भेजे जाने वाले फर्जी लिंक और संदेश डिजिटल फ्रॉड का एक आम माध्यम हैं। इनमें बैंक अकाउंट, क्रेडिट कार्ड, नौकरी, डिलीवरी या सरकारी सेवा से जुड़े फर्जी संदेश शामिल हो सकते हैं।

AI आधारित सिस्टम ऐसे संदेशों में मौजूद पैटर्न और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद करता है।

1.62 करोड़ से ज्यादा खतरनाक लिंक ब्लॉक

एयरटेल के मुताबिक, सिस्टम ने 1.62 करोड़ से अधिक खतरनाक लिंक को भी ब्लॉक किया। ऐसे लिंक यूजर्स को फर्जी वेबसाइटों पर ले जा सकते हैं, जहां उनसे पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या अन्य संवेदनशील डेटा हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।

AI से नेटवर्क सिक्योरिटी मजबूत करने पर जोर

कंपनी का कहना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर खतरों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक सुरक्षा उपायों के बजाय AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल करके संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तेजी से करना जरूरी हो गया है।

हालांकि, किसी भी सुरक्षा प्रणाली के बावजूद यूजर्स के लिए भी सावधानी जरूरी है। अनजान लिंक पर क्लिक करने, OTP साझा करने या फोन पर संवेदनशील बैंकिंग जानकारी देने से बचना डिजिटल फ्रॉड का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।

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