पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन की कीमतों में उछाल के बीच पाकिस्तान सरकार ने खर्च और ईंधन की खपत कम करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं। इसके तहत दुकानों, बाजारों, शॉपिंग मॉल, किराना और जनरल स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा। मैरिज हॉल और अन्य कार्यक्रम स्थलों के लिए रात 10 बजे और रेस्तरां, कैफे व फूड आउटलेट के लिए रात 11 बजे तक की समयसीमा तय की गई है।
पाकिस्तान ने क्यों उठाया यह कदम?
पाकिस्तान ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने ऊर्जा और सरकारी खर्च में कटौती की कोशिश शुरू की है। नए आदेश के तहत सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन भी तीन महीने के लिए 50 फीसदी घटाया गया है। साथ ही सरकारी विभागों में नए वाहन खरीदने और कई तरह के टिकाऊ सामान की खरीद पर रोक लगाई गई है।
सरकार ने गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं पर भी तीन महीने के लिए रोक लगाई है। अधिकारियों को जरूरी बैठकों के लिए टेली-कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल करने और अनिवार्य विदेशी यात्राओं में इकोनॉमी क्लास से सफर करने का निर्देश दिया गया है।
किन जगहों पर लागू नहीं होगा नियम?
सभी सेवाओं को इस समयसीमा के दायरे में नहीं रखा गया है। अस्पताल, क्लीनिक, फार्मेसी, मेडिकल स्टोर, प्रयोगशालाएं, पेट्रोल और सीएनजी स्टेशन, ईवी चार्जिंग स्टेशन, आईटी कंपनियां और कॉल सेंटर जैसी जरूरी सेवाओं को छूट दी गई है। रेस्तरां की टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को भी रात 11 बजे की पाबंदी से छूट मिली है।
क्या भारत पर भी पड़ेगा असर?
भारत पर इसका सीधा असर नहीं, क्योंकि ये पाकिस्तान सरकार के घरेलू ऊर्जा-संरक्षण और खर्च-कटौती के फैसले हैं। हालांकि, दोनों देशों पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों का अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
भारत भी पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। मार्च 2026 में सरकार ने संसद को बताया था कि देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित है तथा घरेलू गैस और सीएनजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत के लिए सबसे बड़ा मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 फीसदी आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
इसलिए पाकिस्तान की तरह भारत में भी भविष्य में ऊर्जा बचत से जुड़े कदमों की जरूरत परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है। फिलहाल पाकिस्तान का फैसला मुख्य रूप से वहां की ईंधन लागत, ऊर्जा आपूर्ति और सरकारी खर्च को नियंत्रित करने की कोशिश है।
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