कम फोन बेचकर ज्यादा कमाई का राज
Apple की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका प्रीमियम प्राइसिंग मॉडल है। जहां भारत में Xiaomi, Vivo, Samsung, Oppo और Realme जैसी कंपनियां अलग-अलग कीमतों पर बड़ी संख्या में स्मार्टफोन बेचती हैं, वहीं Apple का फोकस मुख्य रूप से प्रीमियम और हाई-एंड सेगमेंट पर रहता है।
इसका मतलब है कि Apple भले ही कम संख्या में फोन बेचे, लेकिन प्रत्येक iPhone की औसत बिक्री कीमत दूसरी कंपनियों के मुकाबले काफी अधिक होती है। इसी वजह से यूनिट बिक्री में कम हिस्सेदारी होने के बावजूद कुल स्मार्टफोन बिक्री की रकम में Apple का हिस्सा बहुत बड़ा हो जाता है।
iPhone की प्रीमियम कीमत देती है फायदा
भारत में iPhone को लंबे समय से प्रीमियम स्मार्टफोन के तौर पर देखा जाता है। नए iPhone मॉडल के साथ-साथ Pro और Pro Max जैसे महंगे वेरिएंट Apple की औसत बिक्री कीमत को और बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, Apple का मजबूत ब्रांड और उसका पूरा इकोसिस्टम भी ग्राहकों को आकर्षित करता है। iPhone के साथ Apple Watch, AirPods, Mac और अन्य डिवाइस इस्तेमाल करने वाले ग्राहक कंपनी के इकोसिस्टम में बने रहते हैं।
Apple की बिक्री लगातार बढ़ रही है
भारत में Apple के लिए हाल के साल काफी मजबूत रहे हैं। 2025 में कंपनी की यूनिट हिस्सेदारी रिकॉर्ड करीब 9% तक पहुंची, जो 2024 के लगभग 7% से ज्यादा थी। वहीं Counterpoint के मुताबिक 2025 में Apple वैल्यू के आधार पर भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 28% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा।
आगे और मजबूत हो सकती है स्थिति
Apple की भारत में बढ़ती बिक्री और प्रीमियम स्मार्टफोन की मजबूत मांग कंपनी के लिए बड़ा अवसर है। इसके अलावा भारत में Apple के रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार से भी कंपनी की स्थिति मजबूत हुई है।
इसलिए 9% यूनिट हिस्सेदारी और 28% वैल्यू हिस्सेदारी का अंतर यह समझाता है कि स्मार्टफोन बाजार में सिर्फ ज्यादा फोन बेचना ही ज्यादा कमाई की गारंटी नहीं है। Apple कम डिवाइस बेचकर भी महंगे फोन और प्रीमियम ब्रांड पोजिशनिंग के दम पर बाजार से बड़ी कमाई कर सकता है।
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