सुपारी पत्रकारों ने पैसे लेकर किया 4 साल पुराना वीडियो वायरल...


विवेक गुप्ता : नोएडा से सटे जिले के एक ऐतिहासिक शहर से दूल्हे का हर्ष फायरिंग करते हुए वीडियो वायरल होता है. लगभग हर बड़े चैनल ने इसे चलाया लेकिन किसी ने डिस्क्लेमर नहीं चलाया कि हम इस वीडियो की पुष्टि नहीं करते. 

कुछ इसी तरह की गलती इस जिले के रहने वाले लोगों ने अपने सोशल मीडिया पर की. सब अपनी मर्जी से बिना PCS(J) की परीक्षा पास किए न्यायाधीश बन गए और अपनी मर्जी से यूपी पुलिस/यूपी सरकार की किरकिरी कराते रहे.

बड़ी बात ये वीडियो 2022 का बताया जा रहा है लेकिन न्यूज चैनलों और मीडिया पोर्टलों/वेबसाइट पर ये वीडियो/खबर ऐसे चला जैसे ये अभी का ही वीडियो हो. जबकि ये वीडियो 4 साल पहले का बताया जा रहा है.

TRP और व्यूज की मांग में देश के बड़े मीडिया संस्थानों ने इस वीडियो की पुष्टि तक करने की जहमत नहीं उठाई. ये भी नहीं सोचा AI के दौर में वीडियो एडिटेड भी हो सकता है.(मैं इस वीडियो को एडिटेड नहीं कह रहा हूं बस आपको हर पक्ष से अवगत करा रहा हूं.)

अब आप कहेंगे 2022 और 2026 में क्या अंतर है अपराध तो अपराध है. समझने की कोशिश करिए और मानिए 2022 में किसी और पार्टी की सरकार होती और 2026 में बीजेपी की सरकार है. चूंकि वीडियो 2026 में वायरल हुआ है इसलिए किरकिरी तो आज की सरकार की होती जबकि घटना 2022 की है.

यही बात पुलिस-प्रशासन के लिए भी कही जाएगी. 2022 में घटनास्थल का पुलिस अधिकारी कोई और था और आज पुलिस अधिकारी दूसरे हैं. लेकिन इस वायरल वीडियो से उनकी छवि भी खराब हुई है जबकि उनकी तो कोई गलती ही नहीं.

आंखों के अंधे मीडिया संस्थानों ने ये वीडियो पब्लिश करते समय बताया ही नहीं कि ये 2022 का वीडियो है. कहीं-कहीं पैकेज के बहुत बाद में बताया गया कि ये वीडियो 2022 का है. वहीं कुछ टीआरपीमग्न न्यूज चैनलों ने तो इस वीडियो को ब्रेकिंग न्यूज की तरह दिखाया जैसे 5 मिनट पहले की ही घटना हो.

कुछ मीडिया संस्थान ने जिगाना पिस्टल की बात भी खबर के प्रकाशन के दौरान कही,जैसे उन्होंने मास कॉम/पत्रकारिता का डिप्लोमा/डिग्री करने की जगह किसी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में काम किया हो. इन एंकरों की आंखों ने बाज को भी फेल कर दिया और दूर से ही पहचान लिया कि ये जिगाना पिस्टल है.

भाई आपने कैसे जान लिया कि जिगाना पिस्टल थी,अभी पुलिस जांच कर रही है. वीडियो के AI एडिटेड होने या वास्तविक होने की जांच भी जारी है. पता नहीं देश के मीडिया चैनलों को इतनी जल्दी क्यों है. ये सब बातें तथ्यात्मक और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को भूलकर TRP की रेस में बिना ब्रेक के भाग रहे मीडिया संस्थानों के लिए आईना है.

मीडिया के लिए सिर्फ नंबर और व्यूज महत्वपूर्ण होते हैं सच नहीं. जैसे अगर किसी विधायक की किसी के साथ मारपीट होती है जिसमें विधायक की बिल्कुल भी गलती ना हो तो मीडिया इसे ऐसे दिखाएगा जैसे सारी गलती विधायक की ही है. उसके हेडिंग होंगे,"विधायक ने की दबंगई...","देखिए विधायक की दादागिरी..."

मतलब मीडिया जानती है कि विधायक को विलेन बनाने से ही खबर ज्यादा हिट होगी इसीलिए वो पीड़ित/बेकसूर विधायक के खिलाफ ही खबर चलाती है.

अब आते हैं वीडियो वायरल होने वाले मामले की ग्राउंड रिपोर्ट्स पर,बताया जा रहा है कि ये वीडियो वायरल करवाना पारिवारिक रंजिश का नतीजा था. बाकायदा कुछ दलाल टाइप नहीं बल्कि शुद्ध दलाल पत्रकारों को पैसे देकर ये वीडियो वायरल करवाया गया है. बताया जा रहा है शहर के पसमांदा मुस्लिम में सबसे चर्चित/धनाढ्य परिवार के बीच रिश्तेदारी हुई. लड़की वाला पक्ष किसी बहुत बड़ी बात को लेकर नाराज था. जिसके बाद लड़की पक्ष ने ही अपने दामाद/बहनोई के खिलाफ पुराना वीडियो वायरल करवा दिया.

हालांकि कुरैशी समाज को समझना था यूपी सरकार उनकी विचारधारा के बिल्कुल विपरीत है,मौके की तलाश में है. बहुत मालदार परिवार है इसलिए पुलिस और स्थानीय पत्रकारों के लिए भी किसी का दर्द सिर्फ पैसा कमाने का मौका भर है. 

आज एक पक्ष ने पैसे देकर वीडियो वायरल करवाया है,कल दूसरा पक्ष भी ऐसा या इसी तरह की हरकत कर सकता है. अच्छा होता समाज में बैठकर घर के मामले को निपटा लिया जाता. खैर जिसकी पीड़ा होती है वही जान सकता है लेकिन ये तो बहुत ज्यादा हो गया. लड़की पक्ष की अपनी पीड़ा है,परिस्थिति और दर्द के बारें में तो वो ही महसूस कर सकते हैं. क्योंकि किसी की पीड़ा के बारें में लिखना आसान है लेकिन महसूस वही कर सकता है जो झेलता है,जिस पर गुजरती है.

(मैं बीजेपी को वोट करता आया हूं,मेरी अपनी विचारधारा और पसंद है. लेकिन हमेशा सच बोलने और लिखने की आदत है और आदतें आसानी से नहीं जातीं...पत्रकारिता के धर्म और अपनी पसंद में बैलेंस करना भी अच्छे से जानता हूं...)

कासिम(बदला नाम) जिसका 2022 में निकाह हुआ था. उसे हथियारों के सस्ते शौक ना करके कलम के अनमोल गहने से दोस्ती करनी थी. किताबों से दिल लगाना था,एक धनाढ्य परिवार का नाम रोशन करना था. इस परिवार के पास इतना रुपए-पैसा है कि पानी की तरह बहाने पर भी खत्म नहीं होता. हां अभी भी देर नहीं हुई है बस एक बार नए सिरे से शुरुआत करो. 

मेरे कुरैशी भाइयों को पठान भाइयों से सीखना चाहिए और शिक्षा को सर्वोपरि रखना चाहिए. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब कोई पिछड़ा समाज आगे बढ़ता है.

इस वायरल वीडियो को असली माने तो पुलिस को लड़की पक्ष के ऊपर भी कार्रवाई करनी थी,क्योंकि मेजबान की इतनी जिम्मेदारी तो बनती है और हिंदुस्तानी शादियों में दूल्हा मेहमान पक्ष और दुल्हन मेजबान पक्ष होता है. हर्ष फायरिंग के समय वहां मौजूद जिम्मेदार लोगों की कुछ तो जिम्मेदारी बनती होगी. अब जब वो खुद वीडियो वायरल करवा रहे हैं जबकि 2022 में दूल्हे को ना रोककर वो भी तो इस पाप के भागीदार बने होंगे. कानून भी कहता है इस तरह की घटना में मेजबान भी कानूनन अपराधी होता है.

यहां पर ये बताना भी जरूरी है कि कासिम के ऊपर 2024 में हथियार रखने के मामले में FIR भी हो चुकी है. शायद इस केस में इसकी गिरफ्तारी भी हुई थी. उस समय भी कासिम के परिवार से मोटा पैसा खाया गया था.

सबसे दर्दनाक बात है जिस जोन में ये शहर आता है वहां के DIG/IG देश के बेहद कर्मठ,शानदार और त्वरित कार्रवाई करने वाले IPS अफसर हैं. बताइए 2022 के पुराने मामले में उनकी भी जवाबदेही हो जाएगी जबकि 4 साल पहले वो तो यहां से कहीं बहुत दूर पोस्टेड होंगे. मुझे इस जिले के कप्तान की कार्यशैली के बारें में जानकारी नहीं है लेकिन इतना अच्छे से जानता हूं इस जिले के पूर्व कप्तान बेहद शानदार और जाबांज IPS अफसर रहे थे,उनके कार्यकाल में अपराधी कांपते थे और जेल को अपने लिए सबसे सुरक्षित जगह समझते थे.

इन साहब को अपने शानदार और निष्पक्ष काम का ईनाम श्रीकृष्ण भगवान ने दिया अब वो जाबांज अफसर कान्हा की सेवा कर रहे हैं.

इस वीडियो के वायरल होने से प्रदेश की बीजेपी सरकार पर भी सवाल उठेंगे,चुनाव का समय भी ज्यादा दूर नहीं है. इसलिए कब कौन सी चोट नासूर बन जाए कहा नहीं जा सकता.

बताइए एक पारिवारिक मामले के चक्कर में कुछ दलालों की वजह से पुलिस,सरकार,पत्रकार,आम आदमी सब सवालों के घेरे में आ गए. वीडियो वायरल करने वाले पत्तलकारों को समझना था थोड़े से लालच में वो ना जाने कितनों का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं.

प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से संख्या में बहुत कम पुलिस के सिर में चार साल पुरानी चोट की वजह से दर्द शुरू हो गया. 24*7 ड्यूटी करने वाली पुलिस को बेवजह मीडिया की आलोचना झेलनी पड़ी.

जहां तक मुझे समझ में आता है किसी की फोटो या वीडियो वायरल करना अगर पब्लिक हित में है तो वो ठीक है लेकिन अगर पैसे लेकर वीडियो वायरल किया जाए तो ये भी एक बड़ा अपराध है. इन मामलों में वीडियो वायरल करने वाले की इंटेंशन और जनता के हित की भावना होना ना होना ही निर्णायक होता है. 

पैसे लेकर वीडियो वायरल करने वाले पुलिस के साथ-साथ सरकार के भी अपराधी होते हैं,ये लोग पत्रकारिता के तो गुनाहगार हैं. क्योंकि सुपारी लेकर किसी का मर्डर करना या सुपारी लेकर पत्रकारिता करना एक जैसा अपराध है.

दोनों पक्षों को पारिवारिक मामले को घर में बैठकर निपटाना चाहिए था या फिर पुलिस,कानून से जो मदद लेनी हो वो लेनी चाहिए थी लेकिन पीठ पर इस तरह से वार का मैं तो पक्षधर नहीं हूं. अभी भी मामले को समाज में बैठकर आपस में निपटाना चाहिए दोनों पक्षों को अपनी गलतियां सुधारकर गुनाहगार बनने से बचना चाहिए. समझना चाहिए जब परिवार में फूट पड़ती है तो विवाद की चिता में बाहर वाले सिर्फ हाथ ही सेंकते हैं.

भाई अपना तो साफ है जो भी करना,कहना है सामने और खुलकर हां सच और न्याय सर्वोपरि ही रहता है हमेशा. एक बात और निकाह या शादी के बाद आपकी चॉइस नहीं रहती वो आपकी जिम्मेदारी है जिसे निभाना ही आपके पास एकमात्र विकल्प है.

(मेरी इस ID में लगभग सारे राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के निर्णायक लोग जुड़े हुए हैं इसलिए एक पारिवारिक मामले से उपजे विवाद में पहचान उजागर नहीं की है. उम्मीद है मीडिया के शीर्ष लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से कुछ सीख तो मिलेगी...)

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