मेडिकल साइंस का कमाल: सुअर की किडनी ने 271 दिनों तक बचाए रखी इंसान की जान, दुनिया का पहला 'ब्रिज ट्रांसप्लांट'


 Pig Kidney Transplant: मेडिकल साइंस में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जिसने भविष्य में किडनी की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद पैदा की है। अमेरिका में 66 वर्षीय किडनी फेलियर मरीज टिम एंड्रयूज के शरीर में जेनेटिकली एडिट की गई सुअर की किडनी लगाई गई। यह किडनी करीब 271 दिनों तक काम करती रही, इस दौरान मरीज को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी। बाद में मरीज को इंसानी डोनर की किडनी सफलतापूर्वक मिल गई। इसे सुअर की किडनी से मानव किडनी तक पहुंचने वाला पहला सफल 'ब्रिज ट्रांसप्लांट' बताया जा रहा है।

क्यों खास है यह ट्रांसप्लांट?

किडनी फेलियर के मरीजों के लिए डोनर किडनी की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। कई मरीजों को लंबे समय तक डायलिसिस पर रहना पड़ता है और सभी को समय पर मानव डोनर नहीं मिल पाता। ऐसे में वैज्ञानिक लंबे समय से पशुओं के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल करने की संभावना पर काम कर रहे हैं। इसे जेनोट्रांसप्लांटेशन (Xenotransplantation) कहा जाता है।

इस मामले में सुअर की किडनी को विशेष जेनेटिक बदलावों के जरिए मानव शरीर के लिए अधिक अनुकूल बनाने की कोशिश की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार इस्तेमाल की गई किडनी में 69 जेनेटिक एडिट किए गए थे, जिनका उद्देश्य इम्यून सिस्टम द्वारा अंग को अस्वीकार किए जाने और संक्रमण के जोखिम को कम करना था।

271 दिनों तक डायलिसिस से दूर रहा मरीज

टिम एंड्रयूज को अंतिम चरण की किडनी बीमारी थी। उनके लिए मानव डोनर किडनी मिलने की संभावना भी काफी कम बताई गई थी। ऐसे में जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी उनके इलाज के लिए एक अस्थायी समाधान बनी।

किडनी ने 271 दिनों तक मरीज के शरीर में काम किया, जिससे वह इतने लंबे समय तक डायलिसिस से दूर रह सके। यह अवधि जेनेटिकली एडिटेड सुअर की किडनी के मानव शरीर में काम करने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

फिर मिली इंसानी डोनर की किडनी

271 दिनों के बाद सुअर की किडनी को हटा दिया गया और इसके बाद एंड्रयूज को मानव डोनर की किडनी प्रत्यारोपित की गई। मानव किडनी ने भी अच्छी तरह काम किया। यही वजह है कि इस प्रक्रिया को 'ब्रिज ट्रांसप्लांट' कहा जा रहा है—यानी पशु अंग ने मरीज को उस समय तक सहारा दिया, जब तक मानव डोनर का अंग उपलब्ध नहीं हो गया।

किडनी की कमी दूर करने की नई उम्मीद

इस सफलता से यह संभावना मजबूत हुई है कि भविष्य में जेनेटिकली एडिट किए गए पशु अंग उन मरीजों के लिए अस्थायी या संभावित रूप से लंबे समय का विकल्प बन सकते हैं, जिन्हें मानव डोनर अंग मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ता है।

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इसे अभी सामान्य इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता। ऐसे ट्रांसप्लांट की सुरक्षा, लंबे समय तक अंग के काम करने की क्षमता और इम्यून सिस्टम से जुड़ी चुनौतियों को समझने के लिए आगे और क्लिनिकल रिसर्च की जरूरत होगी। फिर भी 271 दिनों की यह उपलब्धि अंग प्रत्यारोपण के भविष्य के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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