यूपी: जनजाति बहुल बघाड़ू में 23 साल में 110% बढ़े मुस्लिम वोटर, पनौरा में 33% की वृद्धि; जानें क्या कहते हैं आंकड़े


 उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की दो जनजाति बहुल ग्राम पंचायतें बघाड़ू और पनौरा इन दिनों मतदाता आंकड़ों में हुए बदलाव को लेकर चर्चा में हैं। वर्ष 2003 और 2026 के उपलब्ध मतदाता आंकड़ों की तुलना करने पर दोनों गांवों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में हिंदू मतदाताओं की तुलना में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासन ने भी इन आंकड़ों में बदलाव के कारणों की जांच की बात कही है।

दुद्धी तहसील के बघाड़ू गांव में वर्ष 2003 में कुल 3,292 मतदाता थे। इनमें 430 मुस्लिम और करीब 2,864-2,894 हिंदू मतदाता दर्ज थे। वर्ष 2026 में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 4,523 हो गई। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 430 से बढ़कर 902 पहुंची, यानी करीब 110 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं हिंदू मतदाताओं की संख्या में करीब 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल मतदाताओं की संख्या में 23 वर्षों के दौरान 1,231 का इजाफा हुआ।

राबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के पनौरा गांव में भी इसी अवधि में मतदाता संख्या में बदलाव दर्ज हुआ। वर्ष 2003 में यहां कुल 739 मतदाता थे, जिनमें 359 मुस्लिम और 380 हिंदू मतदाता थे। वर्ष 2026 में कुल मतदाता 899 हो गए। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बढ़कर 496 हो गई, जो करीब 32.6 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं हिंदू मतदाताओं की संख्या 380 से बढ़कर 403 हुई, यानी करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद दोनों गांवों में मतदाता संख्या में बदलाव के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बघाड़ू और पनौरा में जमीन के स्वामित्व, पट्टों और बाहरी लोगों के बसने से जुड़ी शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। पनौरा में पुराने पट्टों की जांच भी प्रशासनिक स्तर पर की गई है।

बघाड़ू में जनजातीय भूमि के कथित गलत हस्तांतरण से जुड़े मामलों में प्रशासन कार्रवाई कर चुका है। वहीं पनौरा से जुड़े भूमि मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। हालांकि, मतदाताओं की संख्या में बदलाव के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, इसे लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, दोनों ग्राम पंचायतों की डेमोग्राफी में आए बदलाव की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह 2003 से 2026 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि बघाड़ू और पनौरा में अलग-अलग समुदायों के मतदाताओं की वृद्धि दर में अंतर रहा है। हालांकि, केवल मतदाता आंकड़ों के आधार पर जनसंख्या परिवर्तन के कारणों का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए जनसंख्या, प्रवास, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मृत्यु, स्थानांतरण और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।

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