सेहत से खिलवाड़! 220 दवाओं के सैंपल टेस्ट में फेल, जानें कैसे सामने आई नकली दवाओं की समस्या


 अगस्त 2026 की ड्रग टेस्टिंग रिपोर्ट ने देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर की सरकारी प्रयोगशालाओं में जांचे गए 220 दवा सैंपल तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से एक सैंपल को नकली यानी फर्जी दवा के तौर पर चिह्नित किया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण और बाजार में उनकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से लिया गया एक दवा सैंपल नकली पाया गया। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि इस उत्पाद में किसी दूसरे ब्रांड के नाम का इस्तेमाल किया गया था। ऐसे मामलों में मरीजों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि उन्हें वास्तविक ब्रांड की दवा मिल रही है या उसके नाम पर कोई दूसरा उत्पाद बाजार में बेचा जा रहा है।

गुणवत्ता जांच में फेल होने का क्या मतलब है?

किसी दवा के सैंपल का क्वालिटी टेस्ट में फेल होना जरूरी नहीं कि वह हर स्थिति में नकली हो। दवा कई अलग-अलग गुणवत्ता मानकों पर जांची जाती है। इनमें दवा में सक्रिय घटक की निर्धारित मात्रा, शुद्धता, घुलने की क्षमता और अन्य निर्धारित मानक शामिल हो सकते हैं। किसी एक या अधिक मानकों पर खरा न उतरने पर सैंपल को मानक गुणवत्ता से बाहर माना जा सकता है।

वहीं नकली दवा का मामला अलग होता है। इसमें किसी वास्तविक दवा या ब्रांड की पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पाद मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं, क्योंकि पैकेट पर लिखी जानकारी और अंदर मौजूद उत्पाद में अंतर हो सकता है।

नकली दवाएं बाजार तक कैसे पहुंचती हैं?

दवाओं की सप्लाई चेन में कई स्तर शामिल होते हैं। निर्माण से लेकर पैकेजिंग, थोक वितरण, खुदरा बिक्री और मरीज तक पहुंचने के दौरान अलग-अलग चरणों में निगरानी की जरूरत होती है। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या निगरानी में कमी होती है तो संदिग्ध उत्पाद बाजार तक पहुंच सकते हैं।

अगस्त की रिपोर्ट में 220 सैंपल का गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरना इसी व्यापक निगरानी व्यवस्था के महत्व को सामने लाता है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी फेल सैंपल नकली दवाएं थीं। नकली और मानक से कम गुणवत्ता वाली दवाओं की श्रेणियां अलग-अलग होती हैं।

ऐसे में दवा खरीदते समय पैकेजिंग, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तारीख जैसी जानकारी जांचना जरूरी है। किसी दवा की गुणवत्ता या असली होने को लेकर संदेह हो तो बिना चिकित्सकीय सलाह के उसका इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित स्वास्थ्य अथवा औषधि नियंत्रण विभाग से शिकायत करना उचित है।

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