साल 2014 में पाकिस्तान के कराची स्थित नौसैनिक डॉकयार्ड पर हुए एक हमले ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। इस घटना में सिर्फ बाहरी आतंकी घुसपैठ का मामला नहीं था, बल्कि पाकिस्तान नौसेना के कुछ सेवारत अधिकारियों के कथित तौर पर साजिश में शामिल होने की बात सामने आई थी। हमलावरों का मकसद एक पाकिस्तानी नौसैनिक युद्धपोत पर कब्जा करना और उसका इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना के जहाज के खिलाफ करने का था।
क्या हुआ था 6 सितंबर 2014 को?
6 सितंबर 2014 की सुबह कराची के नौसैनिक डॉकयार्ड में हमलावरों ने प्रवेश करने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावरों में पाकिस्तानी नौसेना के कुछ मौजूदा अधिकारी भी शामिल थे। उन्होंने नौसैनिक वर्दी का इस्तेमाल करते हुए युद्धपोत तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
रिपोर्ट के अनुसार, उनका मुख्य निशाना PNS Zulfiqar था। यह चीन से खरीदा गया पाकिस्तानी नौसेना का फ्रिगेट था। हमलावर इस युद्धपोत पर कब्जा करना चाहते थे, ताकि इसके हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसैनिक जहाज के खिलाफ किया जा सके।
अमेरिकी जहाज को क्यों बनाया गया था निशाना?
बाद में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस साजिश का मकसद PNS Zulfiqar को लेकर समुद्र में जाना और अमेरिकी नौसेना के जहाज पर हमला करना था। अल-कायदा के भारतीय उपमहाद्वीप संगठन (AQIS) ने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। संगठन ने अमेरिकी और भारतीय नौसेनाओं को अपने निशाने के तौर पर बताया था। एक बयान में अमेरिकी नौसैनिक जहाज USS Supply का भी जिक्र किया गया था।
नौसेना के भीतर कैसे पहुंची साजिश?
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह था कि हमलावरों को नौसैनिक प्रतिष्ठान के अंदर पहुंचने में मदद मिली। रिपोर्टों में कहा गया कि हमलावरों में दो सेवारत सब-लेफ्टिनेंट भी शामिल थे। एक पूर्व नौसैनिक कैडेट ओवैस जखरानी का नाम भी सामने आया, जिसने कथित तौर पर इस अभियान का नेतृत्व किया। सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में जखरानी और उसके दो साथियों समेत चार लोग मारे गए।
अमेरिकी विदेश विभाग की 2014 की आतंकवाद संबंधी रिपोर्ट में भी कराची नौसैनिक डॉकयार्ड हमले का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों ने एक नौसैनिक फ्रिगेट को हाईजैक करने की कोशिश की थी।
घटना ने क्यों बढ़ाई चिंता?
यह हमला इसलिए गंभीर माना गया क्योंकि निशाना पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान और नौसैनिक युद्धपोत था। इसके अलावा, अगर युद्धपोत पर कब्जा करने की योजना सफल होती तो इसका सीधा असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों और समुद्री सुरक्षा पर पड़ सकता था।
घटना ने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों में कट्टरपंथी विचारधारा की संभावित घुसपैठ को लेकर भी सवाल खड़े किए। हालांकि, उस समय पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया था कि हमलावर अपने लक्ष्य को हासिल करने से काफी दूर थे।
2014 की यह घटना आज भी पाकिस्तान की सैन्य सुरक्षा और आतंकवादी संगठनों की घुसपैठ से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में गिनी जाती है। खास बात यह थी कि इस मामले में एक युद्धपोत को कब्जे में लेकर उसे विदेशी सैन्य लक्ष्य के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना सामने आई थी।
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