भारत सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नई नीति का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और चिप उत्पादन के लिए विकसित किए जा रहे प्लांटों को लंबे समय तक संचालन में बनाए रखना है। नए नियमों के तहत कंपनियों पर चिप निर्माण संयंत्रों की बिक्री, हस्तांतरण या उन्हें गिरवी रखने को लेकर सख्त शर्तें लागू की गई हैं।
कमर्शियल प्रोडक्शन से पहले प्लांट बेचने पर रोक
दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी कंपनी को अपने सेमीकंडक्टर प्लांट को पूरी तरह कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने से पहले बेचने या गिरवी रखने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा करने के लिए संबंधित नोडल एजेंसी से पूर्व मंजूरी लेना जरूरी होगा।
इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार से वित्तीय सहायता हासिल करने वाली परियोजनाएं निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने से पहले बंद या किसी दूसरी कंपनी को हस्तांतरित न हो जाएं। सरकार से मिलने वाली सहायता का इस्तेमाल देश में वास्तविक सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता तैयार करने के लिए हो, इस पर भी जोर दिया गया है।
1.27 लाख करोड़ रुपये की योजना
सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार ने सेमीकंडक्टर और उससे जुड़े इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें चिप निर्माण के साथ-साथ पैकेजिंग, टेस्टिंग और अन्य संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।
भारत सरकार लंबे समय से देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की कोशिश कर रही है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा उपकरण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में चिप की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू उत्पादन को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार की मंजूरी क्यों जरूरी?
सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने में भारी निवेश और लंबा समय लगता है। सरकार की ओर से कंपनियों को वित्तीय सहायता दिए जाने के बाद यह जरूरी माना गया है कि परियोजनाएं निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ें। प्लांट को समय से पहले बेचने या गिरवी रखने की अनुमति देने से सरकारी सहायता के उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।
इसी वजह से नए दिशा-निर्देशों में परियोजनाओं के स्वामित्व और हस्तांतरण से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया गया है। कंपनियों को किसी भी बड़े बदलाव से पहले संबंधित नोडल एजेंसी की मंजूरी लेनी होगी।
भारत के चिप मिशन के लिए क्यों अहम?
सेमीकॉन 2.0 के नए नियमों से सरकार घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण में दीर्घकालिक निवेश सुनिश्चित करना चाहती है। प्लांटों को कमर्शियल उत्पादन तक बनाए रखने की शर्त से यह कोशिश की जा रही है कि सरकारी प्रोत्साहन का लाभ वास्तविक उत्पादन क्षमता तैयार करने में इस्तेमाल हो।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और सप्लाई चेन से जुड़े अन्य उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। आने वाले वर्षों में सेमीकॉन 2.0 के तहत मंजूर परियोजनाओं की प्रगति इस नीति की प्रभावशीलता का अहम आधार होगी।
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