महिला क्रिकेट की दुनिया में पहली बार आयोजित होने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी पहले श्रीलंका को सौंपी गई थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी श्रीलंका से वापस लेकर भारत को देने की खबर सामने आई है। मेजबानी में हुए इस बदलाव का श्रीलंका पर आर्थिक असर पड़ने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टूर्नामेंट की मेजबानी भारत को मिलने से श्रीलंका को करीब 188 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट की मेजबानी से मेजबान देश को टिकट बिक्री, पर्यटन, होटल, परिवहन, विज्ञापन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से आर्थिक फायदा होता है। ऐसे में आयोजन का अधिकार छिनना श्रीलंका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी पर नजर
महिला चैंपियंस ट्रॉफी का 2027 में पहला आयोजन प्रस्तावित है। इस टूर्नामेंट के जरिए महिला क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी मिलने से मेजबान देश को क्रिकेट के साथ-साथ खेल पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का भी अवसर मिलता है।
श्रीलंका को शुरुआत में इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट की मेजबानी मिलने के बाद वहां क्रिकेट प्रशंसकों और खेल जगत में उत्साह था। हालांकि, अब मेजबानी भारत को दिए जाने की खबर से श्रीलंका को संभावित आर्थिक लाभ से हाथ धोना पड़ सकता है।
भारत के लिए बड़ी जिम्मेदारी
भारत पहले से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बड़े आयोजनों की सफल मेजबानी करता रहा है। देश में क्रिकेट की लोकप्रियता, आधुनिक स्टेडियम, बेहतर प्रसारण सुविधाएं और बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रशंसकों को देखते हुए महिला चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा सकता है।
भारत में टूर्नामेंट होने से महिला क्रिकेट को घरेलू स्तर पर भी बड़ा मंच मिलेगा। खिलाड़ियों को बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने खेलने का अवसर मिलेगा और महिला क्रिकेट की लोकप्रियता को और बढ़ावा मिल सकता है।
श्रीलंका को आर्थिक नुकसान की चिंता
मेजबानी बदलने का सबसे बड़ा असर श्रीलंका की अर्थव्यवस्था से जुड़े उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से फायदा मिलने की उम्मीद थी। होटल, पर्यटन, स्थानीय परिवहन और अन्य व्यवसायों को भी संभावित नुकसान हो सकता है।
हालांकि, 188 करोड़ रुपये के नुकसान का अंतिम आंकड़ा संबंधित आधिकारिक पुष्टि और आयोजन से जुड़े वित्तीय विवरणों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस बदलाव को श्रीलंका के लिए आर्थिक और खेल दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है
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