कच्चे तेल में लगी ‘आग’: 108 डॉलर के पार पहुंची कीमत, पश्चिम एशिया की जंग से भारत पर कितना असर?


 पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 108.77 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है, जो करीब चार महीने का उच्चतम स्तर है। पिछले एक सप्ताह में ही कच्चे तेल की कीमत में 12 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।

भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है और विदेशी मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।

हर 10 डॉलर की तेजी से क्या होगा असर?

अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी भारत की आर्थिक वृद्धि को करीब 20 से 30 आधार अंक तक प्रभावित कर सकती है। यानी अगर तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो इसका असर आर्थिक विकास की रफ्तार पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का प्रभाव केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहता। पेट्रोल-डीजल की लागत बढ़ने पर परिवहन महंगा हो सकता है, जिसका असर माल ढुलाई और विभिन्न वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है।

आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है असर

तेल महंगा होने से सबसे पहले परिवहन क्षेत्र पर दबाव बढ़ता है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ट्रक, बस और अन्य परिवहन सेवाओं की लागत पर पड़ सकता है। इसके बाद इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की दूसरी वस्तुओं की सप्लाई लागत पर भी देखने को मिल सकता है।

हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर असर केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होता। इसमें रुपये की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों के कर तथा तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती

अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतों में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है। भारत के लिए ऐसे समय में कच्चे तेल की खरीद लागत, महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल 108 डॉलर से ऊपर पहुंचा ब्रेंट क्रूड भारत समेत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों के लिए चेतावनी है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

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