Trump Tariff: रूस-ईरान से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी सांसदों की नई रणनीति क्या है?


 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में टैरिफ नीति लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है। अब रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिशों के बीच भारत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट से पारित एक विधेयक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को इस दिशा में और अधिक अधिकार मिलने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद के दूसरे सदन से भी मंजूर हो जाता है, तो रूस या ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

इस संभावित कदम का असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। प्रस्ताव में ऐसे देशों के आयात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चर्चा भी सामने आई है, हालांकि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ के खतरे को लेकर विशेष रूप से चर्चा हो रही है।

सीनेट में दिखी दोनों दलों की सहमति

इस विधेयक की खास बात यह है कि इसे लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के बीच व्यापक समर्थन देखने को मिला है। अमेरिकी सांसदों की रणनीति का मुख्य उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उन देशों को निशाना बनाना है, जो इन दोनों देशों से ऊर्जा या अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद खरीदते हैं।

अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसकी ऊर्जा आय को सीमित किया जा सकता है। इसी तरह ईरान के खिलाफ भी आर्थिक प्रतिबंधों को और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है। रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। ऐसे में यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो भारत के लिए व्यापारिक और रणनीतिक चुनौती बढ़ सकती है।

100 प्रतिशत टैरिफ का अर्थ होगा कि प्रभावित भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी बाजार में लागत काफी बढ़ सकती है। इससे भारत-अमेरिका व्यापार पर असर पड़ने की आशंका होगी और भारतीय निर्यातकों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ सकती है।

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