आज के समय में बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता काफी सतर्क रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों और हालिया शोध का ध्यान अब एक दूसरे महत्वपूर्ण पहलू पर भी गया है—माता-पिता खुद बच्चों के सामने कितनी देर फोन इस्तेमाल करते हैं। कई अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि माता-पिता की फोन आदत बच्चों के स्क्रीन व्यवहार और विकास पर असर डाल सकती है।
बच्चे माता-पिता से सीखते हैं
छोटे बच्चे अपने आसपास के लोगों को देखकर व्यवहार सीखते हैं। जब वे बार-बार अपने माता-पिता को फोन पर स्क्रॉल करते, वीडियो देखते या मैसेज करते देखते हैं, तो उनके मन में भी फोन के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है। इसी वजह से बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के साथ माता-पिता का अपना स्क्रीन व्यवहार भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में 747 नॉर्वेजियन बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें संकेत मिला कि माता-पिता का अधिक फोन इस्तेमाल बच्चों के शब्दावली विकास पर असर डाल सकता है और यह प्रभाव बच्चे के अपने स्क्रीन इस्तेमाल से भी अधिक मजबूत पाया गया।
फोन में व्यस्त रहने से बातचीत कम होती है
बच्चों के विकास में माता-पिता के साथ बातचीत, खेलना और आमने-सामने संवाद बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर माता-पिता बच्चे के साथ रहते हुए लगातार फोन में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चे के साथ बातचीत और साझा गतिविधियों के लिए मिलने वाला समय कम हो सकता है।
इसे कई विशेषज्ञ पैरेंटल फबिंग यानी बच्चे के सामने फोन को ज्यादा प्राथमिकता देने के रूप में देखते हैं। ऐसी आदत से बच्चे को यह महसूस हो सकता है कि माता-पिता उसके बजाय फोन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
सिर्फ बच्चे को फोन न देना काफी नहीं
माता-पिता अक्सर बच्चों से कहते हैं कि फोन कम चलाओ, लेकिन अगर घर में बड़े लोग खुद लगातार स्क्रीन पर व्यस्त रहें तो बच्चे के लिए उस नियम को समझना मुश्किल हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स भी बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल को केवल घंटों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से जोड़कर देखने की सलाह देता है कि स्क्रीन किस गतिविधि की जगह ले रही है और माता-पिता खुद स्क्रीन का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।
माता-पिता क्या कर सकते हैं?
बच्चों के साथ खाना खाते समय, खेलते समय और बातचीत के दौरान फोन को दूर रखना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। जरूरी काम के लिए फोन इस्तेमाल करना अलग बात है, लेकिन बिना जरूरत लगातार स्क्रॉल करने से बचना चाहिए। विशेषज्ञ बच्चों के साथ फोन इस्तेमाल करने की स्थिति में भी बातचीत और सहभागिता बनाए रखने की सलाह देते हैं।
इसलिए बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए केवल उन्हें फोन से दूर रखना पर्याप्त नहीं है। माता-पिता का अपना उदाहरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। घर में स्क्रीन-फ्री समय तय करना और उस नियम का पालन बड़े-बच्चे दोनों करें, तो डिजिटल आदतों को संतुलित करना आसान हो सकता है।
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