पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG को लेकर सरकार की नीति अब पहले के मुकाबले सख्त होती दिखाई दे रही है। जिन इलाकों में PNG की पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां रहने वाले ऐसे उपभोक्ताओं पर कार्रवाई की तैयारी है, जो बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद PNG कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों में संबंधित उपभोक्ताओं की LPG यानी रसोई गैस की सप्लाई बंद की जा सकती है।
PNG को बढ़ावा देने पर जोर
सरकार शहरी क्षेत्रों में पाइप के जरिए रसोई गैस पहुंचाने की व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। PNG को लगातार और सुविधाजनक गैस आपूर्ति के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क तैयार हो चुका है, वहां उपभोक्ताओं को PNG कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके लिए संबंधित उपभोक्ताओं को नोटिस या सूचना भेजी जा सकती है। सरकार और गैस वितरण कंपनियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन इलाकों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ता इस नेटवर्क का इस्तेमाल करें।
नोटिस के बाद क्या होगा?
यदि किसी इलाके में PNG लाइन पहुंच चुकी है और उपभोक्ता को कनेक्शन लेने के लिए नोटिस दिया गया है, लेकिन वह निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद आवेदन नहीं करता है, तो उसकी LPG सप्लाई पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि कार्रवाई की प्रक्रिया स्थानीय नियमों और संबंधित गैस वितरण कंपनी के प्रावधानों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे किसी भी नोटिस को नजरअंदाज न करें और उसमें दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें।
LPG उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
यदि LPG सप्लाई बंद की जाती है तो संबंधित परिवारों को खाना पकाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। ऐसे में जिन घरों तक PNG की सुविधा पहुंच चुकी है, उनके लिए समय रहते कनेक्शन के लिए आवेदन करना जरूरी हो सकता है।
क्यों बढ़ाई जा रही है सख्ती?
PNG नेटवर्क का विस्तार शहरी गैस वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पाइपलाइन के जरिए नियमित गैस आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि उपलब्ध बुनियादी ढांचे का अधिक से अधिक उपयोग हो।
हालांकि, किसी भी उपभोक्ता के लिए LPG सप्लाई बंद होने से पहले लागू नियम, नोटिस की शर्तें और स्थानीय गैस एजेंसी की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। यदि आपके इलाके में ऐसा नोटिस मिला है, तो उसमें दिए गए निर्देशों के अनुसार संबंधित गैस कंपनी या अधिकृत एजेंसी से जानकारी लेना सबसे सही कदम होगा।
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