पाकिस्तान की डीपफेक साजिश! PM मोदी के फर्जी वीडियो से युवाओं को भड़काने की कोशिश, खुफिया एजेंसियों का दावा


 भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कथित डीपफेक वीडियो को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसियों का दावा है कि हाल के दिनों में ऐसे फर्जी वीडियो की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनका मकसद लोगों को गुमराह करना और सामाजिक माहौल को प्रभावित करना है। विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को निशाना बनाकर इन वीडियो के जरिए भ्रम फैलाने और उन्हें दोबारा विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया है कि कई संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स इन वीडियो को बड़े पैमाने पर साझा कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों का आरोप है कि इनमें से कई खाते कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे हैं। इन अकाउंट्स के माध्यम से ऐसे वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री के भाषणों और बयानों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से बदलकर पेश किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक तकनीक की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज और चेहरे को इस तरह बदला जा सकता है कि आम लोगों के लिए असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि इस तरह के वीडियो तेजी से वायरल होते हैं और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि देश के भीतर असंतोष और अविश्वास का माहौल तैयार करना भी हो सकता है। एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर ऐसे खातों और कंटेंट की पहचान करने में जुटी हैं, जो फर्जी जानकारी फैलाने में शामिल हैं।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वीडियो या संदेश को बिना सत्यापन के साझा न करें। यदि कोई वीडियो या बयान संदिग्ध लगे तो उसकी पुष्टि विश्वसनीय समाचार स्रोतों और आधिकारिक चैनलों से जरूर करें। साथ ही, सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली सनसनीखेज सामग्री के प्रति सतर्क रहने की सलाह भी दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग और बढ़ सकता है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता, तथ्य-जांच और साइबर जागरूकता ही इस तरह की भ्रामक मुहिमों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार निगरानी और तकनीकी उपायों को मजबूत कर रही हैं।

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