फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) आमतौर पर धूम्रपान से जुड़ा माना जाता है, लेकिन यह केवल धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं है।
बच्चों में फेफड़ों का कैंसर बेहद दुर्लभ होता है, फिर भी कुछ मामलों में यह हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इसके कारण वयस्कों से अलग हो सकते हैं और समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है।
क्या बच्चों को हो सकता है लंग कैंसर?
हां, हालांकि यह बहुत कम देखने को मिलता है। बच्चों में होने वाले फेफड़ों के ट्यूमर और कैंसर के मामले दुर्लभ हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। अधिकांश मामलों में इसका संबंध धूम्रपान से नहीं होता।
बच्चों में फेफड़ों के कैंसर के संभावित कारण
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आनुवंशिक (जेनेटिक) बदलाव या दुर्लभ जीन म्यूटेशन।
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जन्मजात फेफड़ों की असामान्यताएं या कुछ दुर्लभ बीमारियां।
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लंबे समय तक पैसिव स्मोकिंग (सेकेंड हैंड स्मोक) के संपर्क में रहना।
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वायु प्रदूषण और कुछ हानिकारक रसायनों का लगातार संपर्क।
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पहले किसी कैंसर के इलाज के दौरान दी गई रेडिएशन थेरेपी (कुछ मामलों में)।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
यदि बच्चे में लंबे समय तक निम्न लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए—
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लगातार कई हफ्तों तक खांसी रहना।
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सांस लेने में तकलीफ या घरघराहट।
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सीने में लगातार दर्द।
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खांसी के साथ खून आना (दुर्लभ लेकिन गंभीर संकेत)।
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बार-बार फेफड़ों का संक्रमण होना।
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बिना कारण वजन कम होना या अत्यधिक थकान।
ध्यान रहे कि ये लक्षण केवल कैंसर के नहीं होते, बल्कि कई सामान्य श्वसन रोगों में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए घबराने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
बचाव के लिए क्या करें?
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बच्चों को सिगरेट और तंबाकू के धुएं से पूरी तरह दूर रखें।
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घर और आसपास का वातावरण साफ रखें तथा प्रदूषण से बचाव करें।
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पौष्टिक आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दें।
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लंबे समय तक खांसी या सांस की समस्या होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में लंग कैंसर बहुत दुर्लभ है, इसलिए केवल खांसी या सांस की तकलीफ होने का मतलब कैंसर नहीं होता। लेकिन यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार लौटें, तो समय पर जांच कराना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
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