INS निपुण: 80% स्वदेशी तकनीक से लैस यह युद्धपोत हिंद महासागर में बढ़ाएगा भारत की ताकत


 भारतीय नौसेना की ताकत में एक और अहम इजाफा हुआ है। डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निपुण को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। करीब 80 फीसदी स्वदेशी तकनीक से तैयार यह पोत समुद्र की गहराइयों में नौसेना के अभियानों को नई क्षमता देगा। इसका इस्तेमाल खासतौर पर गहरे समुद्र में डाइविंग ऑपरेशन, पनडुब्बी बचाव और समुद्र के भीतर तकनीकी सहायता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जा सकेगा।

क्या है INS निपुण की खासियत?

INS निपुण को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र की काफी गहराई में जाकर विभिन्न अभियानों में सहायता कर सके। यह अत्याधुनिक डाइविंग सिस्टम से लैस है, जिससे नौसेना के गोताखोर मुश्किल परिस्थितियों में भी लंबे समय तक पानी के भीतर काम कर सकते हैं। पोत में आधुनिक संचार, नेविगेशन और डाइविंग सपोर्ट सिस्टम लगाए गए हैं।

इसकी सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक सैचुरेशन डाइविंग है। इसमें गोताखोरों को विशेष दबाव वाले वातावरण में रखा जाता है, जिससे वे लंबे समय तक समुद्र की गहराई में काम कर सकें। इससे गहरे पानी में मरम्मत, खोज और बचाव जैसे अभियानों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकता है।

पनडुब्बी बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका

INS निपुण को डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) के लिए मदर शिप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर समुद्र की गहराई में किसी पनडुब्बी में तकनीकी खराबी आती है या वह दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो DSRV के जरिए उसमें मौजूद नौसैनिकों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा सकती है।

एक DSRV मदर शिप के तौर पर INS निपुण समुद्र में लंबे समय तक तैनात रहकर ऐसे बचाव अभियानों को सहायता प्रदान कर सकता है। यह क्षमता भारत की पनडुब्बी बचाव व्यवस्था को और मजबूत करती है।

हिंद महासागर में बढ़ेगी रणनीतिक क्षमता

हिंद महासागर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में नौसेना की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। INS निपुण जैसे पोत समुद्र के भीतर निगरानी, बचाव और तकनीकी अभियानों में भारत को अतिरिक्त क्षमता प्रदान करेंगे।

इसके अलावा, करीब 80 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में ऐसे अत्याधुनिक पोतों के निर्माण में देश की घरेलू क्षमता और मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, INS निपुण सिर्फ एक डाइविंग सपोर्ट वेसल नहीं है, बल्कि यह गहरे समुद्र में ऑपरेशन, पनडुब्बी बचाव और नौसैनिक आत्मनिर्भरता के लिहाज से भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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