Health Alert: बीपी की दवाएं कहीं किडनी को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहीं? जानें क्या है पूरा मामला


 

Blood Pressure Medicine: अम्लोडिपिन और लैसिडिपिन को लेकर क्या है चिंता? दवा बंद करने से पहले जानें जरूरी बातें

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें अम्लोडिपिन और लैसिडिपिन जैसी कैल्शियम चैनल ब्लॉकर दवाएं भी शामिल हैं। इन दवाओं को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में किडनी से जुड़े खतरे की चर्चा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, किसी भी दवा को केवल ऐसी खबरों के आधार पर बंद करना सही नहीं है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को समझना जरूरी है।

क्या अम्लोडिपिन से किडनी खराब होती है?

अम्लोडिपिन को सामान्य रूप से ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उपलब्ध शोध में इसे सीधे तौर पर किडनी खराब होने का कारण साबित नहीं किया गया है। इसके उलट, एक अध्ययन में कॉन्ट्रास्ट डाई के संपर्क से होने वाली एक विशेष प्रकार की किडनी इंजरी का जोखिम अम्लोडिपिन लेने वाले मरीजों में कम पाया गया था।

लैसिडिपिन को लेकर क्या सामने आया?

लैसिडिपिन भी हाई बीपी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कैल्शियम चैनल ब्लॉकर दवा है। एक पुराने क्लिनिकल अध्ययन में अम्लोडिपिन और लैसिडिपिन दोनों से ब्लड प्रेशर प्रभावी रूप से कम हुआ था। अम्लोडिपिन के साथ पैरों में सूजन की समस्या लैसिडिपिन की तुलना में अधिक देखी गई थी।

33 प्रतिशत बढ़े खतरे की बात कितनी सही?

बीपी की दवाओं के कारण किडनी खराब होने का 33 प्रतिशत बढ़ा हुआ जोखिम बताने वाली बात को सीधे तौर पर अम्लोडिपिन या लैसिडिपिन के लिए स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं है। उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में ऐसा स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला कि ये दोनों दवाएं सामान्य रूप से किडनी की बीमारी का जोखिम 33 प्रतिशत बढ़ाती हैं।

दवा खुद से बंद करना हो सकता है खतरनाक

अगर आप बीपी की दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना उसे अचानक बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें। अनियंत्रित हाई बीपी खुद किडनी, हृदय और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड क्रिएटिनिन, eGFR और अन्य जांचों के जरिए किडनी की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं।

निष्कर्ष: अम्लोडिपिन या लैसिडिपिन लेने वाले हर व्यक्ति को यह मानने की जरूरत नहीं है कि उसकी किडनी खराब हो रही है। दवा को लेकर कोई चिंता हो तो डॉक्टर से बात करके ही आगे का फैसला लें।

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