H1N1 Alert: फेफड़ों और हार्ट पर भी असर कर सकता है स्वाइन फ्लू, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज


 बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों की चेतावनी, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द हो तो तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह

देश के कई हिस्सों में एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली में इस साल अब तक 1,777 एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञ लोगों को सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दे रहे हैं।

अधिकांश लोगों में फ्लू का संक्रमण हल्का रहता है और वे आराम व उचित उपचार से ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और इसका असर फेफड़ों के साथ-साथ हृदय पर भी पड़ सकता है। फ्लू से निमोनिया, सांस की गंभीर समस्या और पहले से मौजूद हृदय संबंधी बीमारी के बिगड़ने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

फेफड़ों पर कैसे पड़ सकता है असर?

एच1एन1 संक्रमण गंभीर होने पर फेफड़ों में सूजन या निमोनिया जैसी समस्या पैदा कर सकता है। इसके कारण सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है और कुछ मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर भी गिर सकता है। दिल्ली-एनसीआर में डॉक्टरों ने हाल में कुछ मरीजों में सांस से जुड़ी गंभीर जटिलताएं देखी हैं।

अगर बुखार और खांसी के साथ सांस फूलने लगे, सीने में लगातार दर्द हो या ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा हो, तो इसे सामान्य फ्लू समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।

हार्ट पर भी बढ़ सकता है खतरा

फ्लू का संक्रमण शरीर पर व्यापक असर डाल सकता है और पहले से हृदय रोग से जूझ रहे लोगों में स्थिति बिगड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। गंभीर संक्रमण में हृदय संबंधी जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं।

यही वजह है कि हृदय या फेफड़ों से जुड़ी पुरानी बीमारी वाले लोगों, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को फ्लू के लक्षण होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

ये लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान

स्वाइन फ्लू के दौरान तेज या लगातार बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। लेकिन सांस लेने में कठिनाई, लगातार सीने में दर्द, ऑक्सीजन का गिरना, भ्रम या अत्यधिक कमजोरी खतरे के संकेत हो सकते हैं। लक्षण ठीक होने के बाद दोबारा तेजी से बिगड़ना भी गंभीरता का संकेत माना जाता है।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

बचाव के लिए क्या करें?

फ्लू से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें और बीमार होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। लक्षण बढ़ने पर समय पर जांच और उपचार कराना गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

कुल मिलाकर, स्वाइन फ्लू को हर मामले में गंभीर बीमारी मानने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसके रेड फ्लैग लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खासकर सांस और सीने से जुड़े लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

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