मिरगी, जिसे अंग्रेजी में Epilepsy कहा जाता है, एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे या झटके आ सकते हैं। हालांकि, सही इलाज, नियमित दवाओं और कुछ जरूरी सावधानियों के साथ मिरगी से पीड़ित व्यक्ति सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है। इस बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी के कारण अक्सर लोगों के मन में कई गलत धारणाएं बनी रहती हैं।
मिरगी का दौरा आने पर हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते। कुछ लोगों को शरीर में तेज झटके आ सकते हैं, जबकि कुछ लोग कुछ सेकंड के लिए बेहोश या असामान्य स्थिति में चले जाते हैं। दौरे से पहले कुछ मरीजों को अलग तरह की गंध महसूस होना, चक्कर आना या अजीब अनुभूति होना जैसे संकेत भी मिल सकते हैं।
मिरगी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सिर में चोट, स्ट्रोक, मस्तिष्क संक्रमण, जन्म से जुड़ी कुछ स्थितियां या आनुवंशिक कारण इसमें भूमिका निभा सकते हैं। कई मामलों में इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता। मिरगी संक्रामक बीमारी नहीं है और न ही यह किसी छूने या साथ रहने से फैलती है।
मिरगी का इलाज डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाता है। कई मरीजों में नियमित रूप से एंटी-सीजर दवाएं लेने से दौरे नियंत्रित किए जा सकते हैं। इसलिए दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक बंद नहीं करना चाहिए। पर्याप्त नींद लेना, अत्यधिक तनाव से बचना और डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रिगर्स पर ध्यान देना भी जरूरी हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को दौरा पड़े तो उसे सुरक्षित जगह पर लिटाएं और आसपास की खतरनाक वस्तुएं हटा दें। व्यक्ति को जबरदस्ती पकड़ने, मुंह में चम्मच, पानी या कोई अन्य वस्तु डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। दौरे का समय नोट करना और स्थिति गंभीर होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
मिरगी के मरीजों को संतुलित भोजन, नियमित नींद और स्वस्थ दिनचर्या अपनानी चाहिए। किसी खास खाद्य पदार्थ को बिना डॉक्टर की सलाह के पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती। इलाज और जीवनशैली से जुड़ी सलाह व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
सही जानकारी, नियमित उपचार और परिवार के सहयोग से मिरगी के साथ भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है। बीमारी को छिपाने या सामाजिक डर में रहने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेकर उचित इलाज कराना सबसे जरूरी है।
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