'E10 पेट्रोल उपलब्ध हो': पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार ने क्यों की ये मांग, E20 ईंधन से नुकसान पर क्या बोले?


 

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों को ध्यान में रखते हुए E20 के साथ E10 पेट्रोल भी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। उन्होंने खासकर पुराने और कार्ब्यूरेटर वाले दोपहिया वाहनों को संभावित नुकसान से बचाने की जरूरत बताई।

देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है और E20 पेट्रोल को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों के हित में E10 पेट्रोल को भी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि पुराने वाहनों, खासकर कार्ब्यूरेटर वाले दोपहिया वाहनों को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ताओं के पास विकल्प होना चाहिए।

E10 पेट्रोल फिर उपलब्ध कराने की मांग क्यों?

E10 पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है, जबकि E20 में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत होती है। नए वाहनों को E20 ईंधन के अनुकूल बनाया जा रहा है, लेकिन पुराने वाहनों को लेकर लोगों के बीच संभावित नुकसान और रखरखाव की चिंताएं बनी हुई हैं।

नागेश्वरन का मानना है कि E20 के साथ E10 का विकल्प उपलब्ध कराने से पुराने वाहनों के मालिकों को राहत मिल सकती है। खासकर ऐसे दोपहिया वाहन, जिनमें कार्ब्यूरेटर का इस्तेमाल होता है और जिन्हें अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया था, उन्हें लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

E20 से क्या हो सकता है नुकसान?

अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लेकर पुरानी गाड़ियों में ईंधन प्रणाली, रबर और अन्य कुछ पुर्जों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जाती रही है। हालांकि, इसका असर वाहन के मॉडल, उसकी तकनीक, रखरखाव और निर्माता द्वारा तय ईंधन मानकों पर निर्भर कर सकता है।

यही वजह है कि पुराने वाहन मालिकों को अपने वाहन निर्माता की ओर से सुझाए गए ईंधन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। E20 को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए तकनीकी जानकारी और स्पष्ट विकल्प उपलब्ध कराना भी जरूरी माना जा रहा है।

E20 से आगे मिश्रण बढ़ाने से पहले क्या बोले?

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने फिलहाल एथेनॉल मिश्रण को E20 से आगे बढ़ाने से पहले लागत और लाभ का विस्तृत विश्लेषण करने की भी बात कही है। उनका मानना है कि किसी भी नए स्तर के मिश्रण को लागू करने से पहले उसके आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए।

एथेनॉल मिश्रण से आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके साथ ही वाहन मालिकों, खासकर पुराने वाहनों के उपयोगकर्ताओं की चिंताओं का समाधान भी जरूरी है।

पुराने वाहन मालिकों के लिए क्या मायने?

यदि E10 पेट्रोल को E20 के साथ विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जाता है, तो पुराने वाहन मालिक अपनी गाड़ी की अनुकूलता के अनुसार ईंधन चुन सकेंगे। हालांकि, अंतिम निर्णय और ईंधन के इस्तेमाल को लेकर वाहन निर्माता तथा संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, वी. अनंत नागेश्वरन का सुझाव यह संकेत देता है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति में आगे बढ़ते समय पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पुराने वाहनों की तकनीकी जरूरतों और उपभोक्ताओं की चिंताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ