Dengue Critical Phase: बुखार उतर गया तो भी खतरा बाकी, 24-48 घंटे क्यों हैं बेहद अहम?


 डेंगू में बुखार कम होना अक्सर मरीज और परिवार के लिए राहत की बात लगती है, लेकिन यही समय बीमारी के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक हो सकता है। डेंगू का क्रिटिकल फेज आमतौर पर तब शुरू होता है जब बुखार उतरने लगता है और यह करीब 24 से 48 घंटे तक रह सकता है। इस दौरान कुछ मरीजों में बीमारी अचानक गंभीर रूप ले सकती है।

बुखार उतरने के बाद क्या होता है?

डेंगू के शुरुआती दिनों में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, मतली और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ज्यादातर मरीज धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में बुखार कम होने के आसपास शरीर में गंभीर बदलाव शुरू हो सकते हैं।

क्रिटिकल फेज में रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा का रिसाव हो सकता है। इससे शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ सकता है और गंभीर स्थिति में ब्लड प्रेशर गिरने, शॉक या अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए केवल बुखार उतरने को पूरी तरह ठीक होने का संकेत मानना सही नहीं है।

इन चेतावनी संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

क्रिटिकल फेज में तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या सुस्ती, नाक या मसूड़ों से खून आना और शरीर में तरल जमा होने जैसे संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

प्लेटलेट्स ही सब कुछ नहीं

डेंगू में केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाना सही नहीं है। मरीज की पूरी स्थिति, लक्षण, ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांचों की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। हालिया चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि गंभीर डेंगू का आकलन केवल प्लेटलेट काउंट से नहीं किया जाना चाहिए।

बुखार कम हो तो भी रखें निगरानी

डेंगू के दौरान बुखार कम होने के बाद अगले 24-48 घंटे विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई जांच और निगरानी जारी रखें तथा पर्याप्त तरल पदार्थ लेने के बारे में चिकित्सकीय सलाह का पालन करें। किसी भी चेतावनी संकेत के सामने आने पर घर पर इंतजार न करें।

डेंगू के ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर और जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए बुखार उतरने के बाद लापरवाही करने के बजाय मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है।

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