देश के कुछ राज्यों, खासकर गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल संक्रमण है, जो बच्चों में तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। हालिया प्रकोप में कई बच्चों की मौत भी दर्ज की गई है, जिसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं।
चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलता है। कुछ अध्ययनों में मच्छरों और टिक की भी संभावित भूमिका बताई गई है, लेकिन व्यक्ति से व्यक्ति में इसके फैलने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। यह संक्रमण अक्सर मानसून के दौरान या उसके बाद अधिक देखा जाता है।
इस वायरस का सबसे अधिक खतरा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, विशेषकर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को माना जाता है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, शरीर में दर्द और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। गंभीर मामलों में यह संक्रमण तेजी से मस्तिष्क तक पहुंचकर दौरे पड़ना, अत्यधिक सुस्ती, बेहोशी और तीव्र एन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) का कारण बन सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी है।
फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। बच्चों को सैंडफ्लाई के काटने से बचाने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनाएं, मच्छरदानी का उपयोग करें, घर और आसपास साफ-सफाई रखें तथा कीटों के प्रजनन स्थलों को खत्म करें। यदि बच्चे को तेज बुखार के साथ उल्टी, दौरे या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लें।
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